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India-Pakistan Cricket : श्रीनगर एनआईटी में छात्रों के कमरों से बाहर निकलने पर रोक, हुड़दंग मचाया तो कार्रवाई

Sun, 28 Aug 2022 02:35 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

छात्रों को हिदायत दी गई है कि वह संस्थान, छात्रावास में किसी की हार या जीत पर अनुशासन का उल्लंघन न करें। मैच के दौरान छात्रों को अपने कमरों में रहना होगा। किसी को अपने कमरे में लाने व समूह में मैच देखने की अनुमति नहीं होगी।
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भारत बनाम पाकिस्तान - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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क्रिकेट एशिया कप के मद्देनजर रविवार को भारत-पाकिस्तान के बीच दुबई में मैच है। इससे एक दिन पहले शनिवार को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) श्रीनगर ने छात्रों को संस्थान और छात्रावास में कोई अनुशासनहीनता या विवाद खड़ा न करने के निर्देश दिए हैं। डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर ने नोटिस जारी कर कहा कि नियम तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

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छात्रों को हिदायत दी गई है कि वे संस्थान, छात्रावास में किसी की हार या जीत पर अनुशासन का उल्लंघन न करें। मैच के दौरान छात्रों को अपने कमरों में रहना होगा। किसी को अपने कमरे में लाने व समूह में मैच देखने की अनुमति नहीं होगी।

यदि किसी विशेष कमरे में मैच देखने वाले छात्रों का समूह पाया गया तो जिनको कमरा आवंटित होगा, उन्हें संस्थान के छात्रावास के आवास से वंचित कर दिया जाएगा। इसमें शामिल सभी छात्रों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
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नोटिस में हिदायत जारी की गई है कि कोई भी छात्र मैच से संबंधित किसी भी सामग्री को सोशल मीडिया पर पोस्ट न करे। मैच के दौरान या उसके बाद छात्रावास, कमरों से बाहर न निकलें।

2016 में भारत वेस्टइंडीज मैच के दौरान मचा था हुड़दंग

बता दें कि 31 मार्च, 2016 को भारत-वेस्टइंडीज क्रिकेट मैच के दौरान भारतीय टीम की हार के बाद एनआईटी श्रीनगर के सामने पटाखे फोड़े गए थे। इंस्टीट्यूट में मौजूद गैर कश्मीरी छात्रों के हॉस्टल पर कश्मीरी छात्रों की ओर से जश्न मनाने के दौरान पत्थर फेंके गए थे।

इसके बाद कैंपस में तनाव पैदा हो गया था और पुलिस को तैनात करना पड़ा। मामला बढ़ता देख एनआईटी प्रशासन ने संस्थान को अगले आदेश तक बंद रखने का भी नोटिस जारी कर दिया था। बवाल में कई गैर स्थानीय छात्र घायल भी हुए थे और मामले ने तूल पकड़ लिया था।

छात्रों ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर गृह मंत्री, मानव संसाधन मंत्री और प्रधानमंत्री तक से मदद की गुहार लगाई, जिसके बाद उस समय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पूरे मामले में हस्तक्षेप कर तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से बात कर इसका संज्ञान लेने को कहा था।

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