अक्सर आयकर विभाग पर कश्मीर घाटी के लोगों के प्रति नरम रुख अख्तियार करने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इस बार आयकर विभाग ने घाटी के लोगों पर भी आयकर भरने को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
विभाग ने इस बार लगभग 90 हजार नए रिटर्न भरवाए हैं। इनमें से लगभग आधे कश्मीर घाटी के हैं। आयकर की प्रिंसिपल कमिश्नर (जेएंडके) संगीता गुप्त कहती हैं कि घाटी के लोग भी आयकर भरना चाहते हैं। उन्हें रिटर्न का फायदा पता चल रहा है।
यही कारण है कि नए रिटर्न भरने वालों में आधे से ज्यादा कश्मीर के हैं। इसके अलावा पहले बारामुला में आयकर कार्यालय खोलने का विरोध हुआ था, लेकिन अब लोगों को उसकी सहूलियत महसूस हो रही है।
पहले उन्हें आयकर से संबंधित काम के लिए श्रीनगर जाना पड़ता था, लेकिन अब उनके काम बारामुला में ही हो रहे हैं। इससे पैसे के अलावा समय की भी बचत हो रही है।
हालांकि कश्मीर के उद्यमी और कारोबारी इसे लेकर कुछ दबाव में हैं। श्रीनगर के उद्यमियों का कहना है कि डेढ़ साल पहले आई बाढ़ से हुए नुकसान से वह अभी उबर भी न पाए थे कि आयकर विभाग के नोटिस मिलने शुरू हो गए हैं।
कई उद्यमी और कारोबारी तो अभी तक अपने पुराने कारोबार में नहीं लौट पाए हैं। वह अभी भी सरकारी मदद का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार को होलीडे पैकेज देन चाहिए था, लेकिन उन्हें आयकर के नोटिस मिलने से नई समस्या आ गई है।