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जम्मू-कश्मीर में बीते 40 दिन में 16 ने लगा लिया फंदा, जानिए क्या रहे कारण

Thu, 11 Feb 2021 03:45 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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सुसाइड - फोटो : demo pic
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शहर में आत्महत्या करने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। जनवरी से अब तक करीब 40 दिन में 16 लोग फंदा लगाकर जान दे चुके हैं। इसमें ज्यादातर मामले पारिवारिक विवाद, तनाव, प्रेम प्रसंग, जमीन विवाद, नशे के हैं। दो से तीन मामले मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेलने से बने तनाव में भी बच्चों द्वारा फंदा लगाने के मामले सामने आए हैं। पुलिस इन मामलों की जांच कर रही है।
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मरने वालों में युवा ज्यादा हैं। नशा करने के लिए पैसे न मिलने पर युवा फांसी लगाकर जान दे रहे हैं। मंगलवार दोपहर को त्रिकुटा नगर में 12 वर्षीय किशोर (आदित्य) भी घर में कमरे के भीतर फंदे से लटकता मिला। जांच में पता चला है कि वह मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेलता था। वह आठवीं कक्षा में पढ़ता था। पुलिस तफ्तीश में सामने आया कि जब बच्चा फंदे से झूल रहा था तो उसके मोबाइल में गेम चल रही थी। आशंका जताई जा रही है कि गेम में हारने की वजह से तनाव में आकर उसने आत्महत्या कर ली हो।


ये भी घटनाएं हुईं
- एक सप्ताह पहले जीएमसी की कैंटीन में कार्यरत एक युवक ने फंदा लगा लिया। उसके पिता ने बताया कि बेटे का सपना घर बनाना और बहन की शादी करवाना था, लेकिन उसने आत्महत्या कर ली।
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- तीन जनवरी को 30 वर्षीय युवती ने फंदा लगाया। हालांकि इसके कारणों का पता नहीं चल पाया है, पुलिस जांच कर रही है।
- पांच जनवरी को जीएमसी में थनामंडी के 22 वर्षीय युवक ने खुदकुशी कर ली। इसी
- पांच जनवरी को ही सतवारी में 40 वर्षीय व्यक्ति ने फंदा लगा लिया।
- सात जनवरी को छन्नी हिम्मत में व्यापारी ने फंदे से लटकता पाया गया।  
- आठ जनवरी को बिश्नाह के रहने वाले एक व्यक्ति ने फंदा लगाकर जान दे दी।
- 11 जनवरी को बजालता में 33 साल के युवक ने घर में खुदकुशी कर ली।  
- 11 जनवरी को गाड़ीगढ़ में पुलिस कांस्टेबल और उसकी पत्नी फंदे से लटकते मिले।
- 12 जनवरी को डिग्याना में 20 वर्षीय युवती फंदे से लटकती पाई गई।
- बीते दिनों ठठर में भी एक प्रवासी श्रमिक ने फंदा लगा लिया।

फंदा लगाने से हुए मौत मामलों में तफ्तीश जारी है। घरेलू हिंसा से संबंधित मामलों को थानों में सुलझाया जा रहा है। साथ ही लोगों को शांति और प्यार भावना से रहने की अपील भी की जा रही है। आपसी विवाद सुलझाने के लिए थाने में आने की सलाह दी जा रही है। - श्रीधर पाटिल, एसएसपी, जम्मू

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मोबाइल के अधिक प्रयोग से तनाव में रह रहे किशोर
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. जगदीश थापा के अनुसार विभिन्न कारणों से डिप्रेशन में आकर किशोर और युवा आत्महत्या कर रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान आनलाइन शिक्षा से बड़े स्तर पर किशोरों में मोबाइल की लत बढ़ी है। अब स्कूली शिक्षा शुरू होने के साथ ऐसे किशोरों में तनाव बढ़ा है। इसके साथ जिन बच्चों के पास ऑनलाइन शिक्षा के साधन नहीं थे, वे भी डिप्रेशन में रहे हैं, जिसका असर अब दिख रहा है।
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कई तरह की मोबाइल गेम्स में पड़कर किशोर असल जिंदगी से भटक कर सच्चाई को समझ नहीं पाते हैं और इसके विपरीत बनावटी जीवन से प्रेरित होकर आत्महत्या का कदम उठा लेते हैं। किशोरों में तनाव को कम करने के लिए अभिभावक उनकी गतिविधियों पर पूरी निगरानी रखें। उनसे नियमित बातचीत करके उनकी मानसिक और शारीरिक समस्याओं को समझे। जरूरत के मुताबिक ही बच्चों को मोबाइल दें। बच्चों को पारिवारिक समर्थन दें।
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