रियासत में जम्मू-कश्मीर बीओपीईई (जेएंडके बोर्ड आफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जामिनेशन) जुलाई में एमबीबीएस और डेंटल कालेजों के लिए परीक्षा आयोजित करेगा। हाल ही में हुई सीईटी में जो मेडिकल के उम्मीदवार शामिल हुए थे वे भी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा नीट से अलग केंद्र के अध्यादेश को मजूरी देने के बाद यह निर्णय किया गया है। केंद्र ने अध्यादेश के जरिए राज्यों को नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) से एक साल की छूट दी है।
इसका फैसला वीरवार को श्रीनगर सचिवालय में बीओपीईई और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में लिया गया। बीओपीईई के चेयरमैन जीएच तांत्रे ने बताया कि एमबीबीएस और बीडीएस की परीक्षाओं को लेकर बोर्ड की ओर से जल्द ही नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। दूसरे विषयों की पहले ही परीक्षा आयोजित की जा चुकी है।
बोर्ड की ओर से गत 14-15 मई को रियासत में इंजीनियरिंग, वेटनरी, एग्रीकल्चर, आयुर्वेदिक आदि सरकारी सीटों के लिए कामन एंट्रेंस टेस्ट आयोजित किए गए थे। इसमें पहले बोर्ड ने नीट परीक्षा के माध्यम से एमबीबीएस और बीडीएस की परीक्षाएं आयोजित करवाने की बात कही थी, लेकिन कामन एंट्रेंस टेस्ट में अन्य विषयों के साथ हजारों मेडिकल के छात्र भी शामिल हुए।
इसमें पहले दिन फिजिक्स और केमिस्ट्री की परीक्षा में 27496 और दूसरे दिन बायो व गणित की परीक्षा में 29000 उम्मीदवार बैठे थे। जबकि कुल आवेदन 33000 आए थे। जिससे कई हजार उम्मीदवार नीट के चक्कर में परीक्षा में बैठे ही नहीं थे।
बैठक में सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए एमबीबीएस और बीडीएस की परीक्षा आयोजित करवाने का फैसला लिया गया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री सज्जाद लोन, बीओपीईई के चेयरमैन सहित अन्य आला अधिकारी मौजूद रहे।