सर्वे का काम पूरा करने के बाद करीब आठ महीने पहले इसका काम शुरू किया गया है। एक तरफ देविका के सौंदर्यकरण का काम चल रहा है तो दूसरी तरफ पूरे शहर में 129 किलोमीटरल लंबी सीवरेज की पाइप डाली जा रही है। बावजूद देविका में प्रदूषण कम होने के बजाए बढ़ता ही जा रहा है।
बुधवार को तो तेज बारिश के दौरान देविका नदी का एक नया रूप देखने को मिला, जब अचानक देविका का पानी काला हो गया और केवल गंदगी और दूषित पानी नजर आने लगा। हर कोई देविका के इस रूप को देख कर हैरान रह गया। इतना ही देविका नदी के विभिन्न हिस्सों में पॉलीथिन व प्लास्टिक भरा हुआ नजर आया।
एक तरफ तो जिला प्रशासन और नगर परिषद शहर को पूरी तरह से प्लास्टिक करने का दावा कर रहा है, वहीं देविका नदी में जमा प्लास्टिक व पॉलीथिन दावों पर ही सवाल खड़ा कर रहा था। शहर के विभिन्न हिस्सों में आज भी प्लास्टिक व पॉलीथिन का इस्तेमाल हो रहा है और इससे देविका नदी प्रदूषित होती जा रही है।