संवाद न्यूज एजेंसी
पुंछ। जिले में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की तरफ से गोलाबारी के चलते जिले से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने प्रदेशों को लौट गए थे। इनमें से कम संख्या में बाद में लौटे। इससे नियंत्रण रेखा से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में खेतीबाड़ी के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। वर्तमान में लोग खुद मक्की की गुड़ाई में जुटे हैं।
अब ग्रामीणों ने पहले के समय की तरह एक-दूसरे के सहयोग से जिसे स्थानीय भाषा में लेत्री कहा जाता है, मक्की की गुड़ाई का काम शुरू किया है। नियंत्रण रेखा पर स्थित करमाड़ा, खड़ी, अजोट, गुलपुर दिगवार एवं बगयालदरा में सुबह एवं शाम के समय एक-एक खेत में आठ दस लोग मक्की की गुढ़ाई करते नजर आते हैं। गांव करमाड़ा निवासी मोहम्मद शबीर, मोहम्मद मजीद, गुलाम अब्बास और नजीर अहमद का कहना है कि गांव में बीस से तीस वर्ष पहले कोई भी खेतीबाड़ी में मजदूरों से काम नहीं लेता था। सभी लोग इसी तरह काम करते थे। एक मोहल्ले के किसान एक दिन एक किसान के खेत में काम करते थे, दूसरे दिन दूसरे के और तीसरे दिन तीसरे के। अब बाहरी राज्यों के मजदूरों की अनुपलब्धता के बाद हर कोई उसी तरह खेत में नजर आ रहा है।