साइबर स्लेवरी फ्रॉड:
यह आधुनिक समय की मानव तस्करी है। इसमें युवाओं को विदेश में अच्छी और मोटे पैसों वाली नौकरी का लालच दिया जाता है। टूरिस्ट वीजा पर विदेश ले जाकर बंधक बनाकर, उनसे जबरन ऑनलाइन ठगी का काम करवाया जाता है।
इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और फेक लोन एप के चंगुल में न फंसे:
साइबर अपराधी व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर शेयर बाजार और क्रिप्टो एक्सपर्ट बनकर भारी मुनाफे का लालच देते हैं। फर्जी डैशबोर्ड पर नकली मुनाफा दिखाकर पैसे जमा करवाते हैं। इस तरह के फ्राॅड से बचने के लिए बिना जांच के लोन एप इंस्टॉल नहीं करना चाहिए।
डिजिटल अरेस्ट:
इसमें जालसाज खुद को सीबीआई, ईडी या पुलिस अधिकारी बताते हैं। वे लोगों को व्हाट्सएप वीडियो कॉल करते हैं। डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर फर्जी अरेस्ट वारंट और पुलिस की वर्दी दिखाते हैं। पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर केस में फंसाने का डर दिखाकर मोटी रकम ऐंठ लेते हैं। सेवानिवृत्त और बुजुर्ग लोगों को सबसे ज्यादा निशाना बनाते हैं।
ऑनलाइन गेमिंग:
साइबर ठग अब ऑनलाइन गेमिंग से बच्चों और युवाओं को अपना शिकार बना रहे हैं। गेम में हथियार, स्किन और रिवॉर्ड जीतने के लालच में मासूम बच्चे अनजाने में अपने माता-पिता के बैंक खाते खाली कर रहे हैं। पबजी, फ्री फायर जैसे मल्टीप्लेयर गेम्स में बच्चों से चैट के जरिए संपर्क करते हैं। उन्हें गेम में एडवांस लेवल पर जाने, नए हथियार सहित अन्य सुविधाएं नि:शुल्क देने का लालच देते हैं। बच्चों को टेलीग्राम या व्हाट्सएप पर एक अनजान लिंक भेजते हैं। इस लिंक से यूपीआई पिन, ओटीपी या बैंक डिटेल्स मांगते हैं।