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डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते खतरे: साइबर ठगी होने पर 1930 पर करें कॉल, गोल्डन आवर में पैसा बचने की संभावना ज्यादा

Wed, 18 Mar 2026 01:10 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

जम्मू-कश्मीर में साइबर क्राइम बढ़ रहा है, जिसमें डिजिटल अरेस्ट, साइबर स्लेवरी, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, फेक लोन एप और ऑनलाइन गेमिंग से लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। एसएसपी साइबर क्राइम ने कहा कि 1930 पर तुरंत कॉल करना चाहिए, गोल्डन आवर में पैसा बचने की संभावना सबसे ज्यादा रहती है और सोशल मीडिया एवं बैंक डिटेल्स के इस्तेमाल में सावधानी बरतनी जरूरी है।
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अमर उजाला कार्यालय पर कार्यशाला के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए साइबर क्राइम के एसपी रमणीश गुप्ता - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अगर आपको पता चल गया कि आपके साथ साइबर ठगी हो गई है तो जितना जल्द हो सके 1930 पर कॉल करें। ठगी का आधा घंटा गोल्डन आवर माना जाता है। इसमें पुलिस के पास बैंक व अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर पैसा बचाने की संभावना सबसे ज्यादा रहती है। ये बातें मंगलवार को एसएसपी साइबर क्राइम रमनीश गुप्ता ने मंगलवार को अमर उजाला कार्यालय में साइबर क्राइम पर आयोजित कार्यशाला में कहीं।

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एसएसपी साइबर क्राइम ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में साइबर क्राइम का खतरा बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार ने 2022 में जम्मू में साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन सेंटर फॉर एक्सीलेंस शुरू किया। इसमें 20 लाख से अधिक की साइबर धोखाधड़ी होने पर जांच होती है।

उन्होंने साइबर अपराध के बढ़ते खतरों पर चिंता जताते हुए कहा कि लोग सबकुछ जानते हुए भी झूठे प्रलोभन में आ जाते हैं। आधुनिकता के साथ-साथ जालसाजों ने भी ठगी करने का तरीका बदला है। अब ओटीपी पूछकर साइबर अपराध करने वाला समय नहीं रहा है। अब डिजिटल अरेस्ट, साइबर स्लेवरी, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, फेक लोन एप और ऑनलाइन गेमिंग के जरिए लोगों को शिकार बनाया जा रहा हैं।
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लोगों से सोशल मीडिया का सावधानी से इस्तेमाल करने की अपील की। सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ईमेल के पासवर्ड नियमित रूप से बदलने के लिए कहा। किसी भी अनजान या लालच देने वाले लिंक पर क्लिक न करें। व्हाट्सएप पर अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल को नहीं उठाएं। देश में 2025 में 20 हजार करोड़ रुपये की ठगी हुई है। साइबर क्राइम के प्रति जागरूकता ही साइबर अपराधियों की हार है। इस दौरान इंस्पेक्टर कुनाल सिंह जम्वाल ने साइबर हाइजीन, डीएसपी मोनिका ठाकुर ने ऑनलाइन गेमिंग और पीएसआई प्रणव डोगरा ने साइबर अपराध होने पर पुलिस को सूचना कैसे दें, इसके बारे में बताया।

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साइबर स्लेवरी फ्रॉड:
यह आधुनिक समय की मानव तस्करी है। इसमें युवाओं को विदेश में अच्छी और मोटे पैसों वाली नौकरी का लालच दिया जाता है। टूरिस्ट वीजा पर विदेश ले जाकर बंधक बनाकर, उनसे जबरन ऑनलाइन ठगी का काम करवाया जाता है।

इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और फेक लोन एप के चंगुल में न फंसे:
साइबर अपराधी व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर शेयर बाजार और क्रिप्टो एक्सपर्ट बनकर भारी मुनाफे का लालच देते हैं। फर्जी डैशबोर्ड पर नकली मुनाफा दिखाकर पैसे जमा करवाते हैं। इस तरह के फ्राॅड से बचने के लिए बिना जांच के लोन एप इंस्टॉल नहीं करना चाहिए।

डिजिटल अरेस्ट:
इसमें जालसाज खुद को सीबीआई, ईडी या पुलिस अधिकारी बताते हैं। वे लोगों को व्हाट्सएप वीडियो कॉल करते हैं। डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर फर्जी अरेस्ट वारंट और पुलिस की वर्दी दिखाते हैं। पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर केस में फंसाने का डर दिखाकर मोटी रकम ऐंठ लेते हैं। सेवानिवृत्त और बुजुर्ग लोगों को सबसे ज्यादा निशाना बनाते हैं।

ऑनलाइन गेमिंग:
साइबर ठग अब ऑनलाइन गेमिंग से बच्चों और युवाओं को अपना शिकार बना रहे हैं। गेम में हथियार, स्किन और रिवॉर्ड जीतने के लालच में मासूम बच्चे अनजाने में अपने माता-पिता के बैंक खाते खाली कर रहे हैं। पबजी, फ्री फायर जैसे मल्टीप्लेयर गेम्स में बच्चों से चैट के जरिए संपर्क करते हैं। उन्हें गेम में एडवांस लेवल पर जाने, नए हथियार सहित अन्य सुविधाएं नि:शुल्क देने का लालच देते हैं। बच्चों को टेलीग्राम या व्हाट्सएप पर एक अनजान लिंक भेजते हैं। इस लिंक से यूपीआई पिन, ओटीपी या बैंक डिटेल्स मांगते हैं।
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