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जम्मू-कश्मीर: नेकां के सत्ता में आते ही खत्म होगा पीएसए: उमर अब्दुल्ला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Pranjal Dixit Updated Thu, 31 Jan 2019 10:26 PM IST

सार

  • बोले, अफस्पा हटाने के लिए दिल्ली सरकार से होगी बात
  • पूर्ण बहुमत की सरकार दें, किसी के सहारे न रहे सरकार
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उमर अब्दुल्ला - फोटो : फाइल
नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो विवादास्पद लोक सुरक्षा कानून (पीएसए) कुछ ही दिनों में वापस लिया जाएगा। इस कानून के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमा के छह महीने के लिये हिरासत में रखा जा सकता है।

आतंकवाद से ग्रस्त दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में एक सभा में यह घोषणा करते हुए उमर ने कहा कि वे राज्य के युवाओं को बिना मुकदमा चलाए महीनों तक सलाखों के पीछे नहीं देखना चाहते। इस कानून के तहत पकड़े गए बच्चों के माता-पिता रो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में आए तो इस कानून का जाना तय है। अफस्पा को हटाने के लिए केंद्र सरकार से बात करनी होगी। इसके लिए बात की जाएगी। लेकिन जो अपने हाथ में है यानी पीएसए को हटाना वह तो किया ही जा सकता है।


राज्य के लोगों ने गठबंधन के रूप में कई विकलांग सरकारें देखीं। हमने ऐसी सरकारें देखी हैं जहां हम किसी की दया पर रहते हैं। स्थायी सरकार के लिए लोगों को एकजुटता दिखानी होगी और बहुमत की सरकार बनानी होगी, ताकि वह किसी के सहारे न रहे। वह छह साल मुख्यमंत्री रहे तो कांग्रेस के समर्थन से। गुलाम नबी आजाद भी गठबंधन में ही मुख्यमंत्री रहे। मुफ्ती मोहम्मद सईद और महबूबा मुफ्ती भी भाजपा के साथ सरकार में रहे। इसलिए लोगों को नेकां की पूर्ण बहुमत की सरकार बनानी है। बदलाव स्वयं दिखने लगेगा।
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उमर अब्दुल्ला - फोटो : फाइल
नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो विवादास्पद लोक सुरक्षा कानून (पीएसए) कुछ ही दिनों में वापस लिया जाएगा। इस कानून के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमा के छह महीने के लिये हिरासत में रखा जा सकता है।

आतंकवाद से ग्रस्त दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में एक सभा में यह घोषणा करते हुए उमर ने कहा कि वे राज्य के युवाओं को बिना मुकदमा चलाए महीनों तक सलाखों के पीछे नहीं देखना चाहते। इस कानून के तहत पकड़े गए बच्चों के माता-पिता रो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में आए तो इस कानून का जाना तय है। अफस्पा को हटाने के लिए केंद्र सरकार से बात करनी होगी। इसके लिए बात की जाएगी। लेकिन जो अपने हाथ में है यानी पीएसए को हटाना वह तो किया ही जा सकता है।

राज्य के लोगों ने गठबंधन के रूप में कई विकलांग सरकारें देखीं। हमने ऐसी सरकारें देखी हैं जहां हम किसी की दया पर रहते हैं। स्थायी सरकार के लिए लोगों को एकजुटता दिखानी होगी और बहुमत की सरकार बनानी होगी, ताकि वह किसी के सहारे न रहे। वह छह साल मुख्यमंत्री रहे तो कांग्रेस के समर्थन से। गुलाम नबी आजाद भी गठबंधन में ही मुख्यमंत्री रहे। मुफ्ती मोहम्मद सईद और महबूबा मुफ्ती भी भाजपा के साथ सरकार में रहे। इसलिए लोगों को नेकां की पूर्ण बहुमत की सरकार बनानी है। बदलाव स्वयं दिखने लगेगा।

पीडीपी ने साधा निशाना, उमर ने किया पलटवार

उमर की इस घोषणा के बाद नेशनल कांफ्रेंस की धुर विरोधी पीडीपी ने ट्विटर पर उनके खिलाफ  जमकर निशाना साधा। उमर के दावे को खारिज करते हुए पीडीपी ने ट्वीट किया कि एक पार्टी जिसने असहमति की आवाज को दबाने के लिए पीएसए, पोटा (आतंकवाद निरोधक अधिनियम), अफस्पा जैसे कानूनों को स्वीकार किया, 1987 में चुनावों में धांधली की, जेलों में निर्वाचित लोगों को डाल उन्हें आतंकवादी घोषित किया, वे अब पीएसए को रद्द करने के लिए बहुमत मांग रहे हैं। अतार्किक। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वे इस हड़बड़ी वाली प्रतिक्रिया की उम्मीद कर रहे थे। उन्हें निराश न करने के लिए शुक्रिया। आपके पास एक मौका था जब 2014 के बाद आप प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) की तारीफों के पुल बांध रहे थे। आपने पीएसए को क्यों नहीं वापस लिया या अफस्पा को हटाने की कोशिश क्यों नहीं की। उन्होंने कहा कि अब लोगों को तय करना है कि क्या वे पीडीपी को चुनकर पीएसए को बहाल रखना चाहते हैं या फिर इसे हटाने के लिए उनकी पार्टी को चुनते हैं।
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