सेंट्रल जेल कोट भलवाल के अंदर गुरुवार को छापेमारी में कैदियों के पास से मिले मोबाइल फोन और अन्य सामान बरामद होने के बाद जेल विभाग ने विभागीय जांच शुरू कर दी है। डीआईजी जेल विभाग इसकी जांच करेंगे। बताया जा रहा है कि जेल के कुछ कर्मियों की पहचान की गई है, जो आतंकियों और गैंगस्टरों की मदद कर रहे हैं। पांच से छह कर्मियों की पहचान की गई है। इनमें कुछ को ट्रांसफर किया जाएगा तो कुछ की गिरफ्तारी भी हो सकती है।
जेल से मिले मोबाइल फोन और अन्य सामान की जांच तेज कर दी गई है। कार्रवाई में 11 मोबाइल फोन, 13 सिमकार्ड, 4 पेन ड्राइव और अन्य सामान मिला था। इनमें से सिम कार्ड साइबर पुलिस को दिए गए हैं, जबकि मोबाइल फोन, मेमोरी कार्ड और पेन ड्राइव आदि को साइबर पुलिस और चंडीगढ़ की एफएसएल लैब डी कोड कर इसके भीतर की जानकारी का पता लगाएंगे। मोबाइल फोन से नशा तस्करों और गैंगस्टरों के नेटवर्क चलाने की पूरी जानकारी है। लेकिन आतंकी इसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं, यह अभी जांच होने के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल इस मामले में सीआईडी और जेल विभाग दोनों ही कुछ कहने को तैयार नहीं है।
जानकारी के अनुसार कोट भलवाल जेल में आठ सौ से ज्यादा कैदी बंद हैं। 287 कनाल के क्षेत्र में बनी जेल में कई पाकिस्तानी आतंकी, कश्मीरी आतंकी और गैंगस्टर सजा काट रहे हैं। जेल की दीवार नंबर 3, 4, 7, 8 की ऊंचाई 18 से 20 फुट है। जबकि इसके पीछे जंगल है और बाहर से इन दीवारों को फांदना हो तो ऊंचाई और कम हो जाती है। इन दीवारों से कैदी बाहर से ड्रग्स और मोबाइल फोन तक मंगवा रहे हैं। गठजोड़ इस कदर है कि जेल के अंदर होने वाले निर्माण कार्य के लिए आने वाले वाहनों से भी मोबाइल और अन्य सामान मंगवाया जाता है। एक साल पहले जब जेल में छापा मारा गया था, तब जेल में आए एक ऑटो और जेसीबी से भी मोबाइल फोन मिला था। जेल के आसपास रात के समय रोशनी कम रहती है।