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जम्मू-कश्मीर: जेल में गैंगस्टरों-आतंकियों ने मिलाया हाथ, कैदियों का साथ देने वालों की पहचान, गिरफ्तारी की तैयारी

Sat, 17 Jul 2021 12:33 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

हाई सिक्योरिटी सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था में कई खामियां हैं। इन्हीं खामियों का फायदा उठाकर कैदी जेल में रहकर अपना नेटवर्क चलाने में कामयाब हो जाते हैं। जेल में एक्स-रे मशीनें नहीं चलती। जैमर भी नहीं लगे हुए हैं। जेल की कुछ दीवारें ऐसी हैं, जिसके साथ घना जंगल है। ऐसे में बाहर से नशा, हथियार, मोबाइल या फिर अन्य सामान आसानी से अंदर फेंका जा सकता है।
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सेंट्रल जेल कोट भलवाल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सेंट्रल जेल कोट भलवाल के अंदर गुरुवार को छापेमारी में कैदियों के पास से मिले मोबाइल फोन और अन्य सामान बरामद होने के बाद जेल विभाग ने विभागीय जांच शुरू कर दी है। डीआईजी जेल विभाग इसकी जांच करेंगे। बताया जा रहा है कि जेल के कुछ कर्मियों की पहचान की गई है, जो आतंकियों और गैंगस्टरों की मदद कर रहे हैं। पांच से छह कर्मियों की पहचान की गई है। इनमें कुछ को ट्रांसफर किया जाएगा तो कुछ की गिरफ्तारी भी हो सकती है।

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जेल से मिले मोबाइल फोन और अन्य सामान की जांच तेज कर दी गई है। कार्रवाई में 11 मोबाइल फोन, 13 सिमकार्ड, 4 पेन ड्राइव और अन्य सामान मिला था। इनमें से सिम कार्ड साइबर पुलिस को दिए गए हैं, जबकि मोबाइल फोन, मेमोरी कार्ड और पेन ड्राइव आदि को साइबर पुलिस और चंडीगढ़ की एफएसएल लैब डी कोड कर इसके भीतर की जानकारी का पता लगाएंगे। मोबाइल फोन से नशा तस्करों और गैंगस्टरों के नेटवर्क चलाने की पूरी जानकारी है। लेकिन आतंकी इसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं, यह अभी जांच होने के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल इस मामले में सीआईडी और जेल विभाग दोनों ही कुछ कहने को तैयार नहीं है।

जानकारी के अनुसार कोट भलवाल जेल में आठ सौ से ज्यादा कैदी बंद हैं। 287 कनाल के क्षेत्र में बनी जेल में कई पाकिस्तानी आतंकी, कश्मीरी आतंकी और गैंगस्टर सजा काट रहे हैं। जेल की दीवार नंबर 3, 4, 7, 8 की ऊंचाई 18 से 20 फुट है। जबकि इसके पीछे जंगल है और बाहर से इन दीवारों को फांदना हो तो ऊंचाई और कम हो जाती है। इन दीवारों से कैदी बाहर से ड्रग्स और मोबाइल फोन तक मंगवा रहे हैं। गठजोड़ इस कदर है कि जेल के अंदर होने वाले निर्माण कार्य के लिए आने वाले वाहनों से भी मोबाइल और अन्य सामान मंगवाया जाता है। एक साल पहले जब जेल में छापा मारा गया था, तब जेल में आए एक ऑटो और जेसीबी से भी मोबाइल फोन मिला था। जेल के आसपास रात के समय रोशनी कम रहती है।
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जेल में गैंगस्टर, आतंकी और नशा तस्करों के तीन बड़े ग्रुप सक्रिय हैं

कोट भलवाल जेल में बंद गैंगस्टर, आतंकी और नशा तस्करों के तीन बड़े ग्रुप सक्रिय हैं। इनमें से दो ग्रुप आपस में प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। लेकिन इन लोगों ने आपस में हाथ मिला लिया। इनके साथ जेल में बंद एक पुराना आतंकी भी साथ दिखा। जबकि सांबा और कुछ अन्य जगहों के गैंगस्टर भी एक साथ देखे गए। इन लोगों के साथ होने की कुछ तस्वीरें बाहर आ गईं जो पुलिस अधिकारियों तक पहुंच गईं।

इन तस्वीरों को देखकर पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। इससे पहले कि यह लोग मिलकर किसी वारदात को अंजाम देते, पुलिस, सीआईडी और सीआरपीएफ ने संयुक्त कार्रवाई कर छापा मारा। जानकारी के अनुसार संयुक्त टीम ने एक-एक कैदी की तलाशी ली और उनके पास से मोबाइल फोन बरामद किए। बताया जा रहा है कि पुलिस महकमे की ओर से गैंगस्टरों के एक साथ होने की सूचना के बाद ही यह बड़ी कार्रवाई की गई है। सूत्रों के अनुसार जेल में 300 मोबाइल फोन इस्तेमाल किए जा रहे हैं। लेकिन तलाशी में 11 मोबाइल फोन ही मिले।
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