हैदरपोरा मुठभेड़ में मारे गए चार लोगों में से एक आमिर मागरे के पिता मोहम्मद लतीफ ने बेटे का शव हासिल करने के लिए जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वकीलों के माध्यम से वीरवार को दाखिल 18 पन्ने की याचिका में आमिर के पिता लतीफ ने कहा है कि उसके परिवार ने आतंकवाद के खिलाफ हमेशा सरकार का साथ दिया है। उसका बेटा आतंकी नहीं हो सकता। उसे बेटे का शव दिलाया जाए ताकि उसे रीति रिवाजों के तहत दफनाया जा सके।
लतीफ की ओर से एडवोकेट दीपिका सिंह रजावत और अरशद चौधरी ने याचिका दायर की है। लतीफ ने हैदरपोरा मुठभेड़ की जांच करने वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा अपनी रिपोर्ट में सुरक्षाबलों को क्लीन चिट दिए जाने के दो दिन बाद यह कदम उठाया है। एसआईटी ने दावा किया था कि हैदरपोरा में विदेशी आतंकवादी द्वारा डॉ. मुदासिरगुल मारा गया था, जबकि रामबन निवासी आतंकी आमिर माग्रे व मकान मालिक अल्ताफ भट क्रास फायरिंग में मारे गए थे।
लतीफ ने कहा कि उसने एक नागरिक के रूप में काम करके गूल और सिंगलदान क्षेत्र में आतंकवाद से लड़ने और उसे रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। याचिका में उसने 6 अगस्त 2005 की एक घटना का उल्लेख किया है जब उसने अपनी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ लश्कर-ए-ताइबा के एक आतंकवादी को मार डाला था।
वह आतंकी उसके घर में घुस गया और अंधाधुंध फायरिंग कर रहा था। याचिकाकर्ता ने कहा कि उसे इसके लिए सम्मानित किया गया था। फायरिंग में घायल होने के बावजूद अनुकरणीय साहस दिखाने के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा वर्ष 2012 के लिए बहादुरी का राज्य पुरस्कार दिया गया था। इस गोलीबारी में जिसके परिणामस्वरूप उनके चचेरे भाई की भी मृत्यु हो गई थी।
जल्द से जल्द हो सुनवाई
याचिकाकर्ता लतीफ ने कहा कि वह और उसकी पत्नी दुखी और बेचैन हैं क्योंकि उन्हें आखिरी बार अपने बेटे का चेहरा देखने का मौका तक नहीं दिया। अपने बेटे को अपने घर के पास दफनाने की इच्छा व्यक्त की है। याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग करते हुए उसने अपनी अपील में कहा कि आमिर के शव को पूरी तरह सड़ने से बचाने के लिए उसे जल्द से जल्द निकालने की जरूरत है।