अस्पताल में भर्ती से इनकार के बाद बर्फबारी के बीच गर्भवती ने एलडी अस्पताल से कुछ दूर सड़क पर बच्चे को जन्म दे दिया। कड़ाके की ठंड में बच्चे ने दम तोड़ दिया। घटना वीरवार रात की है। इस मामले में डिवीजनल कमिश्नर ने जांच के आदेश दिए हैं। अस्पताल के ऑन ड्यूटी डॉक्टर को जांच पूरी होने तक अटैच कर दिया गया है।
कुपवाड़ा के दूरदराज इलाके मूरी की गर्भवती महिला को वीरवार रात में एलडी अस्पताल में भर्ती करने से मना कर दिया गया। इसके बाद उसने सड़क पर एक बच्चे को जन्म दिया, जिसकी मौत हो गई। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार इससे पहले महिला को बर्फबारी के चलते सड़क बंद होने से मूरी से कंधे पर उठाकर कलारूस अस्पताल ले जाया गया। यहां से उसे कुपवाड़ा और फिर श्रीनगर एलडी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। यहां परिवार वालों ने लाख मिन्नतें की, लेकिन अस्पताल के डाक्टर ने भर्ती नहीं किया। बर्फबारी के बीच परिवार के सदस्य बच्चे के शव के साथ रो रहे थे। तभी यह घटना आम हुई।
मामला प्रशासन तक पहुंचने के बाद कश्मीर के डिवीजनल कमिश्नर बसीर खान ने जांच के आदेश दिए। उन्होंने प्रिंसिपल जीएमसी श्रीनगर से दो दिन के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। डिवकाम ने बताया कि जो कोई भी इस घटना में दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस बीच एलडी अस्पताल के एमएस डॉ. शब्बीर सिद्दीकी ने बताया कि जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल जो डॉक्टर ऑन ड्यूटी थे उन्हें जांच पूरी होने तक अटैच कर दिया गया है।
परिवार वाले बोले, श्रीनगर रेफर न किया होता तो बच सकता था बच्चा
परिवार के लोगों का कहना है कि अगर महिला को श्रीनगर रेफर नहीं किया गया होता तो शायद बच्चा बच सकता था। उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने महिला को श्रीनगर रेफर किया। इस बीच गुज्जर बक्करवाल यूथ कॉन्फ्रेंस के सदस्यों ने भी श्रीनगर की प्रेस कॉलोनी में प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
उमर-महबूबा ने जताया दुख
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस घटना को लेकर दुख जताते हुए जल्द कार्रवाई की उम्मीद जताई। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि मुझे उम्मीद है कि राज्यपाल प्रशासन इस दुखद मामले में तुरंत कार्रवाई करेगा। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी इस घटना को दुखद बताते हुए ट्विटर पर लिखा कि दिल टूटने वाली बात है कि एक गर्भवती को अस्पताल से वापस कर दिया गया। बाद में उसने एक बच्चे को जन्म दिया। माता-पिता को महसूस होने वाले दर्द और आघात को हम महसूस नहीं कर सकते। विडंबना यह है कि इस अस्पताल का नाम महान कश्मीरी संत लल डेड के नाम पर रखा गया है।