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इस बार 30 फीसदी विदेश जाएगा कागजी अखरोट

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जम्मू। कश्मीर में होने वाले प्रसिद्ध कागजी अखरोट की विदेशों से डिमांड आनी शुरू हो गई है। इस बार तीस फीसदी अखरोट विदेशों में निर्यात होगा। देश में चार सौ रुपये में बिकने वाला अखरोट विदेशों में चार गुना ज्यादा मुनाफे पर बिकेगा।
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प्रदेश भर में कागजी अखरोट, सख्त अखरोट और मध्यम अखरोट के नाम से बिकता है। इसकी पैदावार 31 हजार एमटी होती है। इस बार 40 हजार एमटी पैदावार का लक्ष्य रखा गया है। इसका तुड़ान 15 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। सितंबर के दूसरे सप्ताह तक अखरोट देश और विदेशों में पहुंच जाएगा। ई-मंडियों के माध्यम से भी बागवान अपना अखरोट बेच सकेंगे। प्रदेश के रामबन, डोडा और किश्तवाड़ का अखरोट काफी प्रसिद्ध है। कागजी अखरोट की खास बात यह है कि यह काफी नर्म होता है। हाथ से टूट जाता है और इसकी गिरी सफेद होती है। मध्यम वर्गीय अखरोट सख्त होता है। इसकी गिरी काले रंग की होती है। इसका प्रयोग तेल बनाने और खाने के लिए किया जाता है। वहीं, सख्त अखरोट काफी कठोर स्वरूप में होता है। इसकी गिरी की गुणवत्ता काफी बढ़िया होती है।
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चार से पांच सौ रुपये तक मिलते हैं दाम
बाजारों में अखरोट चार सौ से पांच सौ रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाएगा। हालांकि, सामान्य अखरोट के दाम दो सौ रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिलेंगे।
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किस साल कितनी रही पैदावार
साल पैदावार
2017 18 हजार एमटी
2018 22 हजार एमटी
2019 22 हजार एमटी
2020 31 हजार एमटी
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इस बार उमदा फसल होने का अनुमान है। अच्छी गुणवत्ता वाला अखरोट विदेश में निर्यात किया जाएगा। ई-मंडियों के माध्यम से भी अखरोट बेचा जाएगा।
-मंजदून दीन, उपनिदेशक, हार्टिक्लचर प्लानिंग एंड मार्केटिंग विभाग कश्मीर
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