स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि महाराज
जम्मू। श्री महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि महाराज को कैलख संस्कृत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें देववाणी संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए दिया जाएगा। श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के प्रधान महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि जल्द ही जम्मू में कार्यक्रम होगा। इसमें उप राज्यपाल मनोज सिन्हा मुख्य अतिथि होंगे। संस्कृत क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विद्वानों को ट्रस्ट की ओर से 2017 से यह पुरस्कार दिया जा रहा है।
श्री महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि सूरतगिरी बांग्ला, हरिद्वार के ग्यारहवें अध्यक्ष और सन्यास आश्रम विले पार्ले मुंबई के अध्यक्ष हैं। 18 वर्ष की आयु में वह ब्रह्मचारी के रूप में सन्यास आश्रम आए थे। छह मई 1981 को उन्होंने सन्यास धारण किया। वेदांताचार्य संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी और एमए मुंबई विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। 10 मई, 1995 को उनके गुरु महामंडलेश्वर स्वामी ब्रह्मानंद गिरि महाराज ने उन्हें आश्रम की जिम्मेदारी सौंपी और संत-महात्माओं की उपस्थिति में महामंडलेश्वर की उपाधि से सम्मानित किया।
स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि भारत और विदेशों में आध्यात्मिक व्याख्यानों के माध्यम से वैदिक धर्म के बारे में जागरूकता फैलाने और संगठित करने में शामिल रहे हैं। वह वर्तमान में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के सदस्य और श्री माता वैष्णो देवी संस्कृत गुरुकुल कटड़ा के गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष हैं। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में शुरू से ही उनकी सक्रिय भूमिका रही है। श्री माता वैष्णो देवी गुरुकुल कटड़ा के माध्यम से संस्कृत भाषा, सांस्कृतिक और विरासत मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए उनका कार्य सराहनीय रहा है। वह देववाणी संस्कृत एवं भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हुए समाज के उत्थान में अपनी विशिष्ट भूमिका निभा रहे हैं। संवाद