संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। जिन हाथों में किताब होनी चाहिए, उनमें भीख का कटोरा है। यह सारा कसूर उन मां-बाप का है या प्रशासन की अनदेखी का - जिससे मासूम सड़कों पर लोगों से पैसे या खाने का सामान मांगने के लिए हाथ फैलाते हैं। यह एक दिन की बात नहीं, जब से होश संभाला तब से ही जिंदगी का दस्तूर बन गया। ऐसे हालात शनिवार को देखने के लिए मिले जब चार नौनिहाल डोल पकड़कर श्री शनिदेव को उसमें स्थापित कर सुबह छह बजे कासिम नगर से निकलते हैं, ताकि भीख मांगकर घर का खर्च चला सकें। ये सभी बच्चे 14 साल से कम उम्र के हैं। दो की आयु 13 साल तो दो सात साल के हैं। बच्चे कासिम नगर से पैदल चलकर पूरे जम्मू शहर में डोल में तेल और पैसे डलवाने के लिए सड़कों पर घूमने लगे। एक तो बिना चप्पल के आग की भट्ठी की तरह तप रही सड़कों पर चल रहा था।
बच्चे बिक्रम चौक पर पुलिस नाके के पास पहुंचे, लेकिन उनको किसी ने भी यह काम करने से नहीं रोका। हालांकि मई में ही डीसी अवनी लवासा ने कमेटी बनाई थी, जिसमें यह तय किया गया कि शहर में अभियान चलाकर यह ध्यान रखा जाएगा कि कोई बच्चा भीख न मांगे। इसमें शामिल बच्चों का रेस्क्यू कर उन्हें शिक्षा के मंदिर तक पहुंचाया जाए। लेकिन दावे कागंजों तक ही सीमित रह गए। आज भी सड़कों पर बच्चे भीख मांगते देखे जा सकते हैं।
बच्चों का कहना था कि पढ़ाई करने का मन तो करता है, लेकिन माता-पिता तो खुद भीख मांगते हैं, पढ़ाएगा कौन् जो कुछ मिलता है उससे मां दिन में खाने का इंतजाम करती है।
पहला बच्चा - मेरी उम्र 13 साल है। घर में अगर मैं नहीं जाऊं तो खाना कहां से आएगा। यह नहीं है कि मैं इतना कमा लेता हूं कि पूरे परिवार को खिला सकूं, लेकिन फिर भी पैसे मांगकर अपने परिवार को खिलाने की कोशिश करता हूं। यह सब करना पड़ता है।
दूसरा बच्चा - मैं 13 साल का हूं। मेरे पास चप्पल नहीं है, लेकिन अपनी दोस्त की मदद करने के लिए मैं उसके साथ जा रहा हूं। हम पढ़ाई तो करना चाहते हैं, लेकिन क्या करें, नहीं कर पा रहे, क्योंकि परेशानी बहुत ज्यादा है। माता-पिता बोलते हैं कि घर में खाना नहीं है।
तीसरा बच्चा - मेरी उम्र सात साल है। मुझे यह नहीं पता कि यह डोल में जो है वे कौन हैं, लेकिन सुना है कि इससे परेशानी कम होती है, इसलिए हम यह लेकर चलते हैं, क्योंकि इससे पैसे मिल जाते हैं। सुबह मम्मी-पापा घर से भेज देते हैं।
चौथा बच्चा - मेरी उम्र सात साल की है। मां कहती है घर बनाने के लिए पैसा उधार लेकर कासिम नगर में जमीन ली है। अब इसे लौटाने के लिए काम करना होगा। जब पैसे चुक जाएंगे तो पढ़ाई पर ध्यान देंगे। इसलिए पैसे मांगने के लिए सुबह घर से भेज दिया जाता है।
कानून पर एक नजर
बाल मजदूरी (निषेध एवं नियमन) अधिनियम, 1986 के अनुसार 14 साल से कम उम्र के किसी बच्चे को किसी कारखाने या किसी भी काम पर न लगाया जाए। भारतीय संविधान की धारा 39ई कहती है कि बच्चे को अपनी उम्र या ताकत से ज्यादा बड़े काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इसके अलावा संविधान की धारा 24 कहती है कि 14 साल की उम्र तक के बच्चों को किसी भी रोजगार/काम से रोका जाना चाहिए।
भीख मांगने वाले बच्चों की तलाश के लिए अभियान चलाया गया है, लेकिन जून में कोई ड्राइव नहीं की जा सकी। जुलाई से ऐसे बच्चे जो धार्मिक स्थलों के बाहर भीख मांगते हैं या फिर किसी विशेष दिन पर मांगते हैं तो डीसी के निर्देश के अनुसार उन बच्चों को इस दलदल से बाहर निकालने के लिए अभियान आगे बढ़ाएंगे।
- आरती चौधरी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी