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बनिहाल धमाके की हिजबुल व जैश ने रची थी साजिश, जमात-ए-इस्लामी की स्टूडेंट विंग ने तैयार की थी कार

Tue, 30 Apr 2019 02:33 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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बनिहाल कार धमाके का आरोपी हिलाल - फोटो : अमर उजाला
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बनिहाल में सीआरपीएफ कॉनवाय पर हमले की नाकाम साजिश आतंकी संगठनों हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद ने मिलकर रची थी। धमाके में इस्तेमाल की गई कार को प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी की स्टूडेंट विंग जमात-ए-उलबा ने तैयार किया था। जम्मू पुलिस ने इस हमले की प्लानिंग के माड्यूल का पर्दाफाश सोमवार को कर दिया। इस मामले में पुलिस अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें बठिंडा की सेंट्रल यूनिवर्सिटी का पीएचडी स्कालर हिलाल मंटू भी शामिल है, जो जमात की स्टूडेंट विंग का सदस्य है। उसे पिछले सप्ताह बठिंडा से गिरफ्तार किया गया था।

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जम्मू के आईजी एमके सिन्हा ने सोमवार को बनिहाल धमाके की साजिश का पर्दाफाश करते हुए पूरे मामले को सुलझाने का दावा किया है। उन्होंने बताया कि 30 मार्च को बनिहाल में पुलवामा की तरह की कार ब्लास्ट करके सीआरपीएफ कॉनवाय पर हमला करने की कोशिश की गई। अगले ही दिन पुलिस ने इस कार को ब्लास्ट करने वाले ओवेस अमीन नाम के आत्मघाती हमलावर को पकड़ लिया। इसके बाद मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। पुलिस ने दक्षिण कश्मीर के उमर शफी, आकिब शाह निवासी शोपियां, शाहिद वानी उर्फ वाटसन और वसीम अहमद डार उर्फ डाक्टर निवासी चकोरा पुलवामा को दबोचा। इसके बाद बठिंडा की सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहे हिलाल मंटू को पकड़ा। हिलाल को सोमवार को यहां मीडिया के सामने भी पेश किया गया। 

रियाज नायकू ने रची साजिश
 आईजी ने बताया कि इस हमले की पूरी साजिश हिजबुल के कमांडर रियाज नायकू ने रची थी। उसका साथ पाकिस्तानी आतंकी मुन्ना बिहारी ने दिया। मुन्ना के आदेश पर रईस अहमद (शोपियां) और उमर शफी ने ओवेस को आत्मघाती हमला करने के लिए तैयार किया। 

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कार तैयार करने वालों में शामिल था हिलाल

बठिंडा यूनिवर्सिटी से पकड़े आतंकी हिलाल मंटू, वसीम उर्फ डाक्टर, मुन्ना बिहारी, शाह जहां और साहिल अब्दुल्ला ने मिलकर कार को तैयार किया था। मुन्ना बिहारी ने कार में रखा जाने वाला विस्फोटक जमा किया था। लेकिन विस्फोटक कहां से खरीदा गया? कार कहां से ली गई? इसका अभी पता नहीं चल पाया है। मुन्ना बिहारी, साहिल अब्दुल्ला, शाह जहां अभी पकड़ से बाहर हैं।

कोई रिकार्ड नहीं
आईजी का कहना है कि इस हमले की साजिश में ऐसे आतंकियों का चयन किया गया, जिनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं है। स्टूडेंट विंग के आतंकियों को तैयार किया गया, ताकि किसी को कोई शक न हो। यह भी बताया कि स्टूडेंट विंग युवाओं को आतंकी संगठनों में शामिल होने के लिए उकसाती है। 

सफल न होने पर वीडियो कॉल से बताया 
बनिहाल हमला करने से पहले आतंकियों ने 26 मार्च को भी इसी तरह का प्रयास किया था, लेकिन जिस कार में आईईडी लगा रखी थी उसमें धमाका नहीं हुआ। यह हमला भी ओवेस करने वाला था। ओवेस ने धमाका न होने पर वीडियो काल के जरिए मुन्ना बिहारी को इसकी जानकारी दी थी।

गृह मंत्रालय ने जमात पर लगाया था प्रतिबंध
जमात-ए-इस्लामी की कश्मीर की राजनीति में अहम भूमिका है। संगठन ने वर्ष 1971 में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। पहले चुनाव के बाद इसकी स्थिति मजबूत होती गई। अब इसे जम्मू कश्मीर में अलगाववादी विचारधारा और आतंकवादी मानसिकता के प्रचार -प्रसार के लिए प्रमुख जिम्मेदार संगठन माना जाता है। गृह मंत्रालय ने जमात-ए-इस्लामी द्वारा राज्य में आतंकवादियों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं और सहायता उपलब्ध कराए जाने की सूचना मिलने के बाद दो मार्च 2019 को इस संगठन पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था।
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