बठिंडा यूनिवर्सिटी से पकड़े आतंकी हिलाल मंटू, वसीम उर्फ डाक्टर, मुन्ना बिहारी, शाह जहां और साहिल अब्दुल्ला ने मिलकर कार को तैयार किया था। मुन्ना बिहारी ने कार में रखा जाने वाला विस्फोटक जमा किया था। लेकिन विस्फोटक कहां से खरीदा गया? कार कहां से ली गई? इसका अभी पता नहीं चल पाया है। मुन्ना बिहारी, साहिल अब्दुल्ला, शाह जहां अभी पकड़ से बाहर हैं।
कोई रिकार्ड नहीं
आईजी का कहना है कि इस हमले की साजिश में ऐसे आतंकियों का चयन किया गया, जिनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं है। स्टूडेंट विंग के आतंकियों को तैयार किया गया, ताकि किसी को कोई शक न हो। यह भी बताया कि स्टूडेंट विंग युवाओं को आतंकी संगठनों में शामिल होने के लिए उकसाती है।
सफल न होने पर वीडियो कॉल से बताया
बनिहाल हमला करने से पहले आतंकियों ने 26 मार्च को भी इसी तरह का प्रयास किया था, लेकिन जिस कार में आईईडी लगा रखी थी उसमें धमाका नहीं हुआ। यह हमला भी ओवेस करने वाला था। ओवेस ने धमाका न होने पर वीडियो काल के जरिए मुन्ना बिहारी को इसकी जानकारी दी थी।
गृह मंत्रालय ने जमात पर लगाया था प्रतिबंध
जमात-ए-इस्लामी की कश्मीर की राजनीति में अहम भूमिका है। संगठन ने वर्ष 1971 में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। पहले चुनाव के बाद इसकी स्थिति मजबूत होती गई। अब इसे जम्मू कश्मीर में अलगाववादी विचारधारा और आतंकवादी मानसिकता के प्रचार -प्रसार के लिए प्रमुख जिम्मेदार संगठन माना जाता है। गृह मंत्रालय ने जमात-ए-इस्लामी द्वारा राज्य में आतंकवादियों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं और सहायता उपलब्ध कराए जाने की सूचना मिलने के बाद दो मार्च 2019 को इस संगठन पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था।