तेज बारिश के आगे सभी इंतजाम कम लगते नजर आ रहे थे। सड़क पर पैदल चलने वाले से लेकर दोपहिया और चौपहिया वाहनों पर सवार लोग भी बारिश से हुई परेशानी से बच नहीं सके। जब लोगों को सूचना मिली कि तवी नदी में पानी बढ़ जाने से भगवती नगर चौथे पुल का एक हिस्सा बह गया है, तब लोगों के जेहन में दोबारा से सितंबर में आई बाढ़ का मंजर ताजा हो गया।
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सितंबर में आई बाढ़ ने श्रीनगर और कश्मीर संभाग के कुछ जिलों में भारी तबाही की थी, वहीं जम्मू और जम्मू संभाग के कई पहाड़ी बेल्ट इलाकों में भी भयंकर नुकसान हुआ था। खेत खलिहान, मवेशियों से लेकर लाखों लोगों के मकान तहस-नहस हो गए थे। सोमवार की बारिश से जम्मू के चौथे पुल का एक साइड का हिस्सा बह गया।
इसे देखने के लिए लोग जुटने लगे। सितंबर की बाढ़ के दर्द को भुगत चुके लोग अपने जानमाल, घर, मवेशी को लेकर चिंता में पड़ गए। सभी लोग और बारिश न हो कहते हुए फरियाद करने लगे। बेलीचराना के लोग घरों से बाहर निकल आए। वे कभी टूटे हुए पुल को देखते तो कभी तवी में बढ़ते पानी के स्तर को। बारिश से जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ।
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सितंबर माह में भी जोरदार बारिश आई थी, जो कि भयंकर बाढ़ में कब तबदील हो गई, पता ही नहीं चला। उस समय बाढ़ से चौथे पुल का एक हिस्सा बह गया था। निक्की तवी पुल का संपर्क भी टूट गया था। बेलीचराना में एक दर्जन के करीब मकानों को नुकसान पहुंचा था। सीमेंट के पक्के पिलर टूट गए थे, सूड़े चक्क में तबाही मची थी।
फ्लायं मंडाल का पूरा इलाका दिक्कतों में रहा। जम्मू संभाग और श्रीनगर संभाग में भारी तबाही हुई थी। अभी लोग उससे उबर नहीं पाए हैं। बेलीचराना में रहने वाले लोगों में अजब सिंह और प्रभजोत सिंह का कहना है कि पुल को जोड़ने के लिए आरसीसी की स्लैब डालने की जरूरत है।
केंकरा और मिट्टी तवी नदी के पानी के बहाव को रोक नहीं पाते हैं। इस बारे में कई बार संबंधित लोगों को बताया गया है, लेकिन पुल बनाने वाले अपनी औपचारिकता पूरे करके लोगों की जिंदगी दाव पर लगाकर निकल लेते हैं।
नेशनल हाईवे बंद, सैकड़ों यात्री फंसे
सोमवार सुबह से हुई जोरदार बारिश ने शहर में त्राहि-त्राहि करवा दी है। लोग घरों में कैद होकर रह गए। तेज बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में जलभराव हुआ। सड़क पर गड्ढे गए। इससे हादसे होने की आशंका काफी बढ़ गई। भगवती नगर चौथे पुल का एक तरफ का हिस्सा तवी के बहाव में बह गया।
कोई बड़ी दुघर्टना न हो, इसके लिए ट्रैफिक पुलिस ने पुल के साइड का रास्ता बंद कर दिया। तेज बारिश से शहर के कई हिस्सों में जलभराव से जाम लगा। होटल एशिया के नजदीक गड्ढा होने के कारण कई वाहन फंसे रहे। कनाल रोड, जानीपुर, गुम्मट, डोगरा चौक, साइंस कालेज, वेयर हाउस, गांधीनगर, सतवारी, ग्रीन बेल्ट, फार्चून होटल की पिछली तरफ मेन रोड, प्रेम नगर, कृष्णा नगर, ज्यूल और चांद नगर में जलभराव हुआ।
जिस कारण कई दो पहिया वाहन बीच सड़क में बंद हो गए। जाम के कारण लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ गईं। बारिश से बचने के लिए लोग कभी दुकानों के नीचे, तो कभी फ्लाईओवर के नीचे छुपते दिखे या कभी छाता खोलते तो कभी बंद करते दिखे। बारिश सुबह से ही होने के कारण और बिजली की गड़गड़ाहट के आगे अभिभावकों ने विद्यार्थियों को स्कूल से छुट्टी करवा ली।
जोरदार बारिश से रियासत के पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन होने से कई जगह पर रास्ते बंद हो गए, जिसके चलते मुसाफिरों को बस स्टैंड में रुकने के लिए मजबूर होना पड़ा है। सोमवार को तेज बारिश के कारण श्रीनगर की ओर वाहनों को रवाना नहीं किया जा सका है। बारिश से बस स्टैंड में पानी आने से भी लोगों की परेशानियां बढ़ गईं।
पिछले एक माह में जनरल बस स्टैंड में तीसरी बार यात्री बस स्टैंड में रुकने के लिए मजबूर हो गए। सोमवार को भी बस स्टैंड में चार सौ के करीब यात्री रुके। महिलाएं, बच्चे, बूढ़े भी इनमें शामिल हैं, जो कि श्रीनगर, कुपवाड़ा, बारामुला और जम्मू संभाग के अन्य जिलों में जाने वाले हैं। सोमवार को बस स्टैंड में रुके यात्रियों को प्लेटफार्म या शेड में ठहरने को मजबूर होना पड़ा।
मार्च महीने में ज्यादा बारिश ने किसानों को रुला दिया है। बारिश और ओलों ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। सिंचाई वाले क्षेत्रों में लगाई गई रबी की अधिकतर फसलें बर्बाद हो गई हैं, जिसके चलते किसानों की रोजी रोटी पर भी पानी फिर गया है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी बारिश से किसानों की फसलों के भारी नुकसान पहुंचने की बात मानी है।
कंडी क्षेत्र में ओले और बारिश से तिलहन की फसलों को नुकसान पहुंचा है, जबकि गेहूं को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को खेतों से पानी निकालने की सलाह दी है। कुदरत की मार झेल रहे किसानों ने अब इस नुकसान की भरपाई के लिए सरकार से गुहार लगाई है।
इसको लेकर किसान यशपाल, राजेंद्र कुमार, प्रीतम, सुरजीत सिंह आदि का कहना था कि कड़ी मेहनत के बाद खेतों में बढ़िया क्वालिटी के बीज और खाद डाल कर बंपर पैदावार लेने के लिए फसलों को बोया गया था। मार्च महीने में अत्यधिक बारिश ने खेतों में खड़ी फसलों को बर्बाद कर दिया।
मवेशियों को बहा ले गई बारिश सोमवार सुबह से हो रही बारिश ने तबाही मचा कर रख दी है। शहर के नगरोटा क्षेत्र में कई भेड़-बकरियां पानी में बह गईं। कई छोटे-मोटे पुल बह गए। इससे लोगों की आवाजाही बाधित रही। शहर के नरवाल इलाके में पानी भर जाने से तीन वाहन फंस गए। इन्हें पुलिस की मदद से बाहर निकाला गया।
नगरोटा में कई जगहों पर गुज्जर बकरवाल समुदाय के लोग अपनी भेड़-बकरियां चरा रहे थे। तभी अचानक बारिश आने से भेड़-बकरियां पुलों के नीचे जाकर खड़ी हो गईं। बारिश धीरे-धीरे बढ़ती रही और एकदम से नालों में पानी का ज्यादा बहाव आने से भेड़-बकरियां बह गईं।
पुलिस की मानें तो 600 से 700 भेड़-बकरियां पानी में बह गई हैं, लेकिन अभी सही आंकड़ा सामने नहीं आया है। नगरोटा के थाना प्रभारी विजय कुंडल का कहना है कि पीड़ितों से जानकारी जुटाई जा रही है। बताया जा रहा है कि कटल वटाल एरिया में भी एक एक पुल क्षतिग्रस्त हो गया। इससे काफी लोगों की आवाजाही बंद हुई है।