शरीर एक वाहन की तरह है और दिल इसका इंजन। इसलिए लंबे समय और दूर तक इस गाड़ी को चलाने के लिए दिल को संभालकर रखना जरूरी है। मगर ज्यादा आरामदायक जिंदगी और धूम्रपान की लत में पड़ कर युवाओं का दिल दगा दे रहा है।
अनियमित दिनचर्या और दौड़ती जिंदगी में बेतहाशा तनाव से बुढ़ापे में मिलने वाला दिल का रोग अब युवाओं को भी तेजी से चपेट में ले रहा है।
मंगलवार को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में सिलवनिया यूएसए में भारतीय मूल के विख्यात हृदय विशेषज्ञ डा. राज दबे ने हृदय रोगों पर जीएमसी फैकल्टी के साथ अनुभव साझा किए।
यूएसए से आए विशेषज्ञ डा. दबे ने अनुभव साझा किए
इस दौरान कांप्लेक्स कार्डियो वैसकुलर पर हुई वर्कशाप में स्थानीय डाक्टरों के साथ कई बिंदुओं पर चर्चा की गई। डा. दबे ने सुपर स्पेशलिटी में कई सर्जरी में अपना योगदान दिया।
मंदिरों के शहर जम्मू पहली बार आए इंडो वैसकुलर और कांप्लेक्स वैसकुलर में विशेषज्ञ डा. दबे ने कहा कि भारत में पश्चिमी सभ्यता को बढ़ावा मिलने से इसका रोजमर्रा की दिनचर्या पर सीधा प्रभाव पड़ा है, जिससे सबसे ज्यादा युवा प्रभावित हैं।
धूम्रपान का चलन बढ़ा है। यहां लोगों में रुटीन चेकअप को लेकर जागरूकता नहीं है। युवाओं में शारीरिक गतिविधियां न के बराबर रह गई हैं। डाइट पर कोई संतुलन नहीं है, जिससे सीधा असर दिल पर पड़ रहा है।
20 साल के युवा भी हो रहे दर्दे-दिल के शिकार
अमूमन चालीस साल की उम्र में मिलने वाले हृदय रोग अब 20 साल के जवानों को हो रहे हैं। इसमें पुरुष रोगियों की संख्या अधिक है।
कार्डियोलाजी विभाग के एचओडी डा. सुशील शर्मा ने कहा कि ऐसी वर्कशाप से आधुनिक तकनीक पर चर्चा करने के साथ मरीजों को विदेशी चिकित्सा का लाभ देने के प्रयास किए गए हैं। भविष्य में भी ऐसी वर्कशाप को नियमित किया जाएगा।