जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने स्थानांतरण आदेश रद्द करने के लिए दायर एक याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सुरक्षा मामलाें से जुड़े तबादलों में अदालतें अथवा ट्रिब्यूनल दखल नहीं दे सकते। कैट के न्यायिक सदस्य राकेश सागर जैन और प्रशासनिक सदस्य आनंद माथुर ने कहा कि स्थानांतरण सेवाकाल का हिस्सा है। रूटीन तबादलाें में भी अदालतें वहीं दखल दे सकती हैं, जहां पर वैधानिक नियमों का उल्लंघन अथवा जानबूझ कर किसी को परेशान किया गया हो।
याची के अनुसार उसे एंटी हाईजैकिंग एयरपोर्ट पर स्थानांतरित किया गया है। उसे वापस श्रीनगर मुख्यालय भेजा जाना चाहिए। याची ने कहा कि उसे समय से पहले स्थानांतरित किया गया है, जबकि कई कर्मचारी अपना स्टेशन कार्यकाल पूरा करने के बाद भी स्थानांतरित नहीं किए गए। कैट ने कहा कि स्थानांतरण को लेकर अदालतें और ट्रिब्यूनल केवल तभी हस्तक्षेप कर सकती हैं, जब वैधानिक नियमों का उल्लंघन हुआ है। यह मामला तो सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। एयरपोर्ट बेहद संवेदनशील जगह है, जहां पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जाते हैं। यह पूरी तरह से सरकार का अधिकारक्षेत्र है, लिहाजा इसमें अदालतें व ट्रिब्यूनल दखल नहीं दे सकते। कैट ने कहा कि सुरक्षा बल का हिस्सा है और सुरक्षा बलों को देश के भीतर और बाहर से होने वाले किसी भी खतरे से निपटने के लिए तैयार किया जाता है। ऐसे में यह याचिका खारिज की जाती है।