कठुआ के रसाना गांव में आठ साल की बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म व हत्या के नाबालिग आरोपी के खिलाफ किशोर न्याय बोर्ड सोमवार से सुनवाई शुरू करेगा। आरोप तय करने के बाद बोर्ड अब अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों व दलीलों पर जिरह करेगा।
क्राइम ब्रांच को भेजे गए एक नोटिस में सोमवार को मुकदमा शुरू करने के लिए अभियोजन साक्ष्य और गवाहों को लाने के लिए कहा गया है।
इस आदेश से क्राइम ब्रांच को झटका लगा है क्योंकि पिछले वर्ष उसने दावा किया था कि आरोपी नाबालिग नहीं है। उसी समय से मामले की सुनवाई नहीं हुई थी।
नोटिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ किशोर न्याय बोर्ड (जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड )ने 8 जुलाई को आरोप तय कर दिये थे तथा अगली सुनवाई की तारीख 15 जुलाई तय की है।
नोटिस के अनुसार, क्राइम ब्रांच से कहा गया है कि वह साक्ष्यों व गवाहों के साथ ही इस मामले में नियुक्त सरकारी वकील की उपस्थिति भी सुनिश्चित करे। किशोर पर खानाबदोश समुदाय की आठ साल की छोटी बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या करने का आरोप है।
क्राइम ब्रांच ने किशोर होने के दावे के खिलाफ दी थी याचिका
क्राइम ब्रांच ने आरोपी के किशोर होने के उसके दावे के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। क्राइम ब्रांच ने इस मामले में सरकारी मेडिकल कॉलेज (जम्मू ) के मेडिकल बोर्ड की एक रिपोर्ट भी संलग्न की थी जिसमें दावा किया गया था कि आरोपी की उम्र 19 से कम और 21 से ज्यादा नहीं है।
पठानकोट स्थानांतरित कर दी गई थी सुनवाई
इस मामले की सुनवाई पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पठानकोट सत्र न्यायालय में स्थानांतरित कर दी गई थी।
10 जून को अन्य आरोपियों को सुनाई थी सजा
पठानकोट सत्र न्यायालय ने इस साल 10 जून को सांझी राम समेत छह को दोषी ठहराते हुए विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया और परवेश कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जबकि पुलिसकर्मियों आनंद दत्ता, तिलक राज और सुरेंद्र वर्मा को पांच साल की सजा सुनाई गई थी। जबकि सांझी राम के बेटे विशाल को बरी कर दिया गया था।
17 माह बाद आया था फैसला
रसाना कांड का फैसला घटना के 17 माह बाद आया था। कठुआ जिले के रसाना गांव से 8 साल की एक नाबालिग का 10 जनवरी 2018 को अपहरण कर लिया गया था। उसका षव 17 जनवरी को मिला था। बच्ची के साथ देवस्थान में सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी।