संवाद न्यूज एजेंसी
आरएस पुरा। जम्मू संभाग के लिए सरकार की ओर से पशुओं के उपचार के बड़े वेटरनरी रेफरल अस्पताल में दवाइयों की कमी है। यहां पहुंचने वाले पशु पालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जम्मू संभाग के दूरदराज के जिलों के पशुपालक भी बीमार पशुओं का उपचार कराने यहां पहुंचते हैं ।
कठुआ, सांबा, रियासी, उधमपुर, जम्मू आदि के पशुपालक पशुओं को कोई बड़ी बीमारी होने पर वह यहीं उपचार कराने आते हैं। ओपीडी में हर रोज 30 से 40 पशुओं को उपचार कराने के लिए लाया जाता है। कई पशुओं की इमरजेंसी में सर्जरी भी करनी पड़ती है। उपचार के लिए तीन विंग हैं, जिसके लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित वेटरनरी डॉक्टर के लिए शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थी भी समय-समय पर प्रैक्टिकल करने के साथ अपनी पढ़ाई करते हैं। मौजूद डॉक्टर संजय अग्रवाल ने बताया कि ओपीडी का समय सुबह 9 से शाम 5 बजे तक है, जबकि छुट्टी के दिन 10 से 1 तक का समय रखा गया है।
स्थानीय संवाददाता ने जब वेटनरी रेफरल अस्पताल का दौरा किया तो वहां स्वांजना गांव से एक किसान अजीत कुमार ढाई वर्षीय गाय लेकर पहुंचे थे। गाय के पेट में अधिक दर्द होने पर डॉक्टरों ने जांच के दौरान पाया कि पेट के भीतर ही बछड़ा मर चुका है। ऑपरेशन किया तो पेट में से दो मुंह और आठ टांगों वाला बछड़ा निकाला गया। ऑपरेशन के दौरान लगभग 20 बोतल ग्लूकोज सहित अनेक प्रकार की दवाइयां अस्पताल प्रबंधन की ओर से दी गईं। बाद में किसान अजीत कुमार को गाय को भर्ती करने के उपरांत आगे की दवाइयां बाजार से लेने के लिए कहा गया।
अस्पताल में पशुओं के लिए अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे सहित अनेक उपकरण है। यहां पशु लेकर पहुंचे पशु पालक सरवन कुमार का कहना है कि गाय के सींग निकलवाने के लिए वह आया है। ऑपरेशन कर निकलवाए जाएंगे। कुछ दवाइयां अस्पताल से मुहैया, जबकि अन्य बाजार से लाए जाने के लिए कहा गया। यहां उपचार की व्यवस्था तो बेहतर है, बस दवाइयां बाजार से लानी पड़ती हैं। पशुपालक रमेश लाल ने कहा कि पशु के अधिक बीमार होने पर ही पशु लाना बेहतर है। कई लोग गांव में ही पशुओं के बीमार होने पर उपचार कराते हैं, पर उससे लाभ नहीं हो पाता। किसी पशु के फैक्चर होने पर यहां पर बेहतर उपचार होता है।
एक पालतू कुत्ते का उपचार कराने के लिए नानक नगर जम्मू से पहुंचे सरदार गुरदीप सिंह ने कहा कि इंजेक्शन बाजार से लाने पड़ते हैं। सरकार को चाहिए कि वेटरनरी रेफरल अस्पताल में पहुंचने वाले लोगों को जरूरत के मुताबिक दवाइयां मुहैया कराई जाए।
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स्कॉसट की ओर से दवाइयां मुहैया कराई जाती हैं। अगर विभाग की ओर से दवाइयां मुहैया कराई जाएं तो पशुपालकों को दवाइयां उपलब्ध कराई जा सकती हैं। दूसरे जिलों से पशुओं के बीमार होने पर जो भी पशुपालक यहां लाना चाहता है, उसके लिए विशेष वाहन की व्यवस्था है। अगर किसी पशु को कोई बीमारी है तो डॉक्टरों से संपर्क किया जा सकता है।
-डॉ एमएस भडवाल, डीन, वेटरनरी विभाग