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Jammu News: चार मेडिकल कॉलेजों से रेफर किए जा रहे दिल के मरीज

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- जीएमसी कठुआ, उधमपुर, डोडा, राजोरी में कैथलैब नहीं, जम्मू भेजे जा रहे 10 जिलों के मरीज
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- सुपर स्पेशियलिटी जम्मू में भी शाम को बंद हो जाती है लैब, इमरजेंसी की सुविधा भी नहीं

- 2832 मरीजों को पिछले साल अपने जिले में नहीं मिला इलाज

अमर उजाला ब्यूरो

जम्मू। जम्मू संभाग के दस जिलों के कार्डियो मरीजों के लिए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जम्मू की एकमात्र कैथलैब का ही सहारा है। डोडा, उधमपुर, कठुआ और राजोरी के मेडिकल कालेजों (जीएमसी) में यह सुविधा नहीं है। सुपर स्पेशियलिटी जम्मू में भी शाम को कैथलैब बंद कर दी जाती है। जिसके बाद रात और सुबह तक कार्डियो मरीजों के लिए सरकारी स्तर पर जीएमसी जम्मू ही विकल्प बचता है। जीएमसी प्रशासन का दावा है कि अस्थायी पेसमेकर जैसे आपात कार्डियो मामले को शाम के बाद देख लिया जाता है, लेकिन 24 घंटे कैथलैब की सुविधा न होने से मरीजों को इंतजार करना पड़ता है।

रेशमघर (जम्मू) स्थित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को 2013 में शुरू किया गया था, तब जीएमसी जम्मू में एक कैथलैब (सीसीयू) का प्रावधान था। लेकिन वर्ष 2014 में इसे बंद कर दिया गया। अब एकमात्र कैथलैब को सुपर स्पेशियलिटी में ही चलाया जा रहा है। सुपर स्पेशियलिटी में पिछले दस सालों में आपात कार्डियो केंद्र की भी व्यवस्था नहीं की जा सकी है। पहले कार्डियो मरीज जीएमसी जम्मू में आता है और उसके बाद उसकी सर्जरी की सुपर स्पेशियलिटी में व्यवस्था की जाती है। सुपर स्पेशियलिटी की कैथलैब में सुबह 10 से शाम (सर्जरी मामलों के मुताबिक) कई बार 6 बजे तक कैथलैब को खोला रखा जाता है, जिसके बाद अगले दिन सुबह तक यह बंद रहती है। यहां दो यूनिटों में रोजाना 20 से 22 कार्डियो मामले की सर्जरी की जाती है। जिसमें पेस मेकर, एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, स्टंट आदि सर्जरी की जाती है। सुपर स्पेशियलिटी और जीएमसी जम्मू में कहीं भी चौबीस घंटे कैथलैब की सुविधा न होने के कारण मरीज परेशान रहते हैं। इसमें खासतौर पर शाम के बाद आने वाले कई मरीजों को तीमारदार मजबूरन निजी अस्पतालों में ले जाते हैं। विशेषतौर पर जीएमसी में इमरजेंसी होने के कारण यहां लंबे समय से चौबीस घंटे चलने वाली कैथलैब की जरूरत रही है। लेकिन अभी तक किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया है। इसमें शाम के बाद जीएमसी पहुंचने वाले हार्ट फैलियर मामलों में मरीजों की जान पर बनी रहती है। हालांकि ऑनकाल कार्डियो विशेषज्ञ को सुपर स्पेशियलिटी से बुलाने का प्रावधान होता है, लेकिन इस सारी लंबी प्रक्रिया में मरीज को तत्काल उचित चिकित्सा मिलना मुश्किल होता है। पिछले कुछ महीनों में पारा गिरने के कारण जीएमसी में रोजाना 8 से 10 हार्ट अटैक से जुड़े मामले पहुंच रहे हैं। जिसमें कइयों की विभिन्न तरह की सर्जरी की जरूरत रहती है।
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दो कैथलैब के लिए प्रस्ताव भेजा : प्रिंसिपल







जीएमसी जम्मू के प्रिंसिपल डा. आशुतोष गुप्ता का कहना है कि जीएमसी जम्मू और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में एक-एक कैथलैब के लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। इसमें सरकारी स्तर पर प्रत्येक कैथलैब के लिए जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन की ओर से 12 करोड़ रुपये के रेट मंजूर किए गए हैं। कोशिश की जा रही है कि जीएमसी जम्मू में एक कैथलैब को चौबीस घंटे के लिए स्थापित किया जाए, जिससे कार्डियो मरीजो को तत्काल उचित चिकित्सा मिल सके।
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जम्मू संभाग के स्वास्थ्य आपात केंद्रों पर मिले कार्डियोवैस्कुलर के मामले

वर्ष 2022 2681

वर्ष 2023 2832

वर्ष 2024 (जनवरी तक) 224

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जिला कठुआ और राजोरी अधिक प्रभावित

जम्मू संभाग के स्वास्थ्य आपात केंद्रों पर वर्ष 2022 में सबसे अधिक कार्डियोवैस्कुलर के मामले जिला कठुआ और राजोरी में मिले। इसमें कठुआ में 708, राजोरी में 381, जम्मू में 356, उधमपुर में 342, सांबा में 245 मामले मिले। इसी तरह वर्ष 2023 में सबसे अधिक कार्डियोवैस्कुलर के मामले जिला उधमपुर (620) में मिले। इसके अलावा पुंछ में 387, कठुआ में 323, सांबा में 302, जम्मू में 295, डोडा में 270 और राजोरी में 265 मामले मिले।
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