आईआईटी जम्मू में चल रही इंटरनेशनल कांफ्रेंस में शामिल विशेषज्ञ। स्रोत : स्वयं।
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आईआईटी के विशेषज्ञों ने सुझाए जल प्रदूषण के केमिकल की जगह बायोलॉजिकल निदान
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। आम लोगों की जिंदगी में रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाले पर्सनल केयर से जुड़े उत्पाद शैंपू, इत्र, फेसवॉश आदि भी पानी में प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। इसके अतिरिक्त फार्मास्युटिकल्स कंपाउंड भी नई चुनौती बने हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के विशेषज्ञों के अनुसार पानी को प्रदूषण से मुक्त करने का केवल बायोलॉजिकल समाधान ही प्रभावी है। केमिकल निदान पर्यावरण को और नुकसान पहुंचाएंगे। ये इसलिए भी अधिक नुकसानदायक हैं क्याेंकि सामान्य एसटीपी में इनका ट्रीटमेंट मुश्किल से होता है। ज्यादातर जगह पुराने प्लांट लगे हैं। आईआईटी जम्मू में जल विज्ञान, रिमोट सेंसिंग और जलवायु परिवर्तन : हाल के रुझान और प्रगति विषय पर चल रही इंटरनेशनल कांफ्रेंस में यह बात सामने आई। इस कांफ्रेंस का रविवार को समापन हो गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन, जल सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता से संबंधित चुनौतियों का समाधान करने के लिए टेक्नोलॉजी आधारित रिसर्च पर जोर दिया। आईआईटी जम्मू के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से डॉ. दिव्येश वराडे, डॉ. प्रतीक कुमार और डॉ. वेद प्रकाश रंजन के समन्वय में हुए इस सम्मेलन में आईआईटी रोपड़, आईआईटी मंडी, आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी इंदौर, एनईईआरआई नागपुर, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रीय केंद्र जम्मू आदि संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए। छह सत्रों में 60 से अधिक तकनीकी पत्र प्रस्तुत किए गए। ये पत्र जीपीएस एप्लिकेशन, जल और अपशिष्ट प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र अध्ययन, सतत इंजीनियरिंग, प्राकृतिक आपदा जोखिम मूल्यांकन और एआई-आधारित पर्यावरणीय समाधानों पर आधारित थे।