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Jammu News: बच्चों में मोटापे के साथ बढ़ रही पित्त की थैली में पथरी

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- जीएमसी जम्मू के डॉक्टरों ने 13 साल के दौरान 380 बच्चों के रिकॉर्ड का किया अध्ययन
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- मोटापे से जुड़े मामलों का हिस्सा 2013 में दो फीसदी था, 2025 में बढ़कर 13 फीसदी हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। बच्चों में बढ़ता मोटापा कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकता है। जीएमसी जम्मू के डॉक्टरों के एक अध्ययन में बच्चों की पित्त की थैली में पथरी के मामलों से जुड़ा एक अहम बदलाव सामने आया है। अस्पताल में इलाज कराने वाले बच्चों में मोटापे से जुड़े मामलों का हिस्सा वर्ष 2013 में दो फीसदी था, जो 2025 में बढ़कर 13 फीसदी हो गया। यानी मोटापे की वजह से बच्चों में पित्त की थैली में पथरी के मामले बढ़ रहे हैं।
जीएमसी जम्मू के डॉक्टरों ने जनवरी 2013 से दिसंबर 2025 तक पित्त की थैली में पथरी का इलाज कराने वाले बच्चों के रिकॉर्ड का अध्ययन किया। इसमें सर्जरी विभाग के डॉ. वरुण महाजन, डॉ. संजय भसीन और डॉ. विवेक भगत सहित छह डॉक्टर शामिल थे। अध्ययन में शामिल 380 बच्चों में आधे से ज्यादा की उम्र 11 से 14 साल थी।
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अध्ययन में मोटापे से जुड़े मामलों का हिस्सा बढ़ा, जबकि रक्त संबंधी कुछ बीमारियों से जुड़े मामलों का हिस्सा घटा। वर्ष 2013 में ऐसे मामलों का हिस्सा 14 फीसदी था, जो 2025 में घटकर दो फीसदी रह गया।
करीब 48 फीसदी बच्चों में पथरी होने की कोई स्पष्ट वजह नहीं मिली। 18.4 फीसदी बच्चों के परिवार में पहले भी पथरी की समस्या रही थी। वहीं, 14.7 फीसदी बच्चों को पहले एंटीबायोटिक दवाएं दी गई थीं।
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पेट में दर्द सबसे आम शिकायत
अध्ययन में 60 फीसदी बच्चों को पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द की शिकायत थी। करीब 45 फीसदी बच्चों को अपच की परेशानी थी, जबकि 44 फीसदी बच्चों को पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द हुआ। वहीं, 20.5 फीसदी बच्चों में अल्ट्रासाउंड के दौरान बिना किसी स्पष्ट लक्षण के पथरी का पता चला। अध्ययन में शामिल 380 बच्चों में 212 बच्चे 11 से 14 साल के थे। यह कुल बच्चों का 55.8 फीसदी है। वहीं, 5 से 10 साल के 130 बच्चे और पांच साल से कम उम्र के 38 बच्चे थे। इनमें 248 लड़के और 132 लड़कियां शामिल थीं।
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डब्ल्यूएचओ के अनुसार बच्चों को मोटापे से बचाने के 6 आसान तरीके
- पौष्टिक भोजन दें : बच्चों को फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज खिलाएं
- मीठे पेय कम दें : कोल्ड ड्रिंक और ज्यादा चीनी वाले पैकेटबंद खाद्य पदार्थों से परहेज करें
- रोज खेलने दें : 5 से 17 साल के बच्चों को रोज कम से कम 60 मिनट शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए
- मोबाइल-टीवी का समय घटाएं : बच्चों को लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठे रहने से बचाएं
- वजन बढ़ने पर डॉक्टर से मिलें : बच्चे की उम्र और लंबाई के हिसाब से वजन की जांच कराएं
- बच्चों का हौसला बढ़ाएं : वजन को लेकर ताने न दें। परिवार की खानपान और दिनचर्या में सुधार करें। बिना डॉक्टर की सलाह के वजन घटाने वाली दवाएं या सख्त डाइट न अपनाएं।
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