जीएमसी की अपील पर एनएमसी ने पुराना फैसला बरकरार रखा, दोबारा अपील की तैयारी
2023-24 के बैच में आठ सीटों में कटौती के आदेश में भी बदलाव नहीं, अब प्रस्तुति देने के लिए नई दिल्ली में दो सदस्य जाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जीएमसी जम्मू में प्रशासनिक स्तर की गलती और गंभीर लापरवाही का खामियाजा एमबीबीएस छात्रों को भुगतना पड़ सकता है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने जीएमसी और प्रदेश सरकार की अपील पर पुराना फैसला बरकरार रखा है। इसमें 2022 के बैच में अतिरिक्त चार एमबीबीएस सीटें रखने पर कोई स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। इसी तरह 2023-24 के बैच में आठ एमबीबीएस सीटों में कटौती का फैसला बरकरार है। अब जीएमसी प्रशासन दोबारा अपील करने जा रहा है। इसके लिए दो सदस्यों को जल्द नई दिल्ली में प्रस्तुति देने के लिए भेजा जाएगा।
जीएमसी प्रशासन ने बड़ी लापरवाही कर 2022 के बैच में निर्धारित 180 एमबीबीएस सीटों के बजाय 184 पर दाखिले कर दिए। इसका खुलासा होने पर एनएमसी गंभीर हो गया। प्रदेश प्रशासन की ओर से दो समितियों ने मामले की जांच की और पूर्व प्रिंसिपल डॉ. शशि सूदन व संबंधित क्लर्क को जिम्मेदार पाया। सरकार और जीएमसी की ओर एनएमसी को बताया कि संबंधित मामले में प्रिंसिपल का तबादला और क्लर्क को निलंबित कर दिया है। इसके बाद एनएमसी ने दोबारा जीएमसी प्रशासन की अपील पर बैठक की, लेकिन फैसले में बदलाव नहीं किया और जीएमसी प्रशासन को पत्र भेज दिया। अब सवाल यह उठता है कि अगर एनएमसी जीएमसी प्रशासन की दूसरी अपील पर कोई राहत नहीं देती तो पिछले बैच के उक्त चार एमबीबीएस सीटों के छात्रों का क्या होगा जो एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। इसके साथ नए बैच में भी जीएमसी को आठ सीटें गंवानी पड़ेंगी, जिसका स्थानीय उम्मीदवारों को सीधा नुकसान होगा।
सीटें बचाने की कोशिश जारी
जीएमसी के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष गुप्ता का कहना है कि एनएमसी से दोबारा अपील करने जा रहे हैं। उम्मीद है कि पिछले बैच की चार अतिरिक्त सीटों के मामले में राहत मिल जाएगी। कोशिश की जा रही है कि नए सत्र की आठ सीटें भी वापस ली जाएं।