राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस
- निजी प्रयोगशालाओं में 10 हजार से 40 हजार रुपये तक का खर्च, जीएमसी जम्मू में मुफ्त
- डायमंड्स केंद्र में बीते दो साल में हुईं स्तन और फेफड़ों के कैंसर की 600 आधुनिक जांचें
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कैंसर का पता चलने के बाद मरीज और उसके परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीमारी के अनुसार सही इलाज चुनने की होती है। हर मरीज में कैंसर की प्रकृति एक जैसी नहीं होती और न ही सभी पर एक जैसा इलाज असर करता है। ऐसे में बायोमार्कर जांच से डॉक्टरों को कैंसर कोशिकाओं में मौजूद खास संकेतों और बदलावों की जानकारी मिलती है। इससे मरीज के लिए उपयुक्त दवाएं और इलाज का तरीका चुनने में मदद मिलती है। निजी प्रयोगशालाओं में इन जांचों को करवाएं तो 10 हजार से 40 हजार रुपये तक खर्च होते हैं। वहीं जीएमसी जम्मू के डायमंड्स केंद्र में स्तन और फेफड़ों के कैंसर से जुड़ी आधुनिक बायोमार्कर जांचें मुफ्त की जा रही हैं। पिछले दो साल में केंद्र में ऐसी 569 जांचें की जा चुकी हैं।
बायोमार्कर शरीर या कैंसर कोशिकाओं में मौजूद ऐसे संकेत होते हैं, जिनसे बीमारी के बारे में अहम जानकारी मिलती है। इनकी जांच से पता चलता है कि कैंसर किस तरह का है और उस पर कौन-सी दवा असर कर सकती है। हर मरीज के लिए सभी जांचें जरूरी नहीं होतीं। डॉक्टर मरीज की बीमारी और जरूरत के अनुसार जांच करवाते हैं। जीएमसी के पैथोलॉजी विभाग की अध्यक्ष और डायमंड्स केंद्र की नोडल अधिकारी डॉ. ज्योत्सना सूरी के अनुसार, केंद्र में पिछले दो साल में स्तन कैंसर से जुड़ी 219 और फेफड़ों के कैंसर से जुड़ी 350 बायोमार्कर जांचें की गई हैं। इस तरह कुल 569 जांचें हो चुकी हैं। निजी प्रयोगशालाओं में जांच के प्रकार के अनुसार मरीजों को 10 हजार से 40 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। जीएमसी में ये जांचें मुफ्त होने से मरीजों को बड़ी आर्थिक राहत मिल रही है।
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स्तन कैंसर में चार, फेफड़ों के कैंसर में भी कई तरह के मार्कर
स्तन कैंसर के मरीजों में चार प्रमुख मार्कर की जांच की जाती है। इनमें ईआर, पीआर, एचईआर2 और काई-67 शामिल हैं। इनसे कैंसर कोशिकाओं की प्रकृति और उनके बढ़ने की गति के बारे में जानकारी मिलती है। फेफड़ों के कैंसर में टीटीएफ-1, पी-40, पी-63, सीके-5/6, सीके-7 और नैप्सिन जैसे मार्कर की जांच की जाती है। इसके अलावा एएलके, आरओएस-1 और पीडी-एल1 की जांच भी होती है। ईजीएफआर में बदलाव का पता लगाने के लिए आरटी-पीसीआर जांच की जाती है।