- ओपीडी में चेकअप के बाद जीएमसी में भर्ती करने पड़ रहे मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। रेशमघर में स्थापित राज्य कैंसर संस्थान में ओपीडी शुरू होने के सात माह बाद भी इंडोर सुविधा नहीं मिल पाई है। इससे कैंसर मरीजों को ओपीडी में दिखाने के बाद भर्ती होने के लिए जीएमसी में भेजा जा रहा है। राज्य कैंसर संस्थान 100 बिस्तर का अस्पताल है, लेकिन मौजूदा डे केयर कीमोथैरेपी में 30 ही बिस्तर स्थापित हैं।
संस्थान में डे केयर कीमोथैरेपी और ओपीडी सेवा को इसी साल फरवरी में शुरू किया गया था। ओपीडी के साथ इंडोर वार्ड शुरू करने की योजना थी, लेकिन अप्रैल में अस्पताल से डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन) के पैरा मेडिकल स्टाफ के चले जाने से स्टाफ की भारी किल्लत हो गई। इससे नई व्यवस्थाएं लागू नहीं की जा सकीं। कीमोथैरेपी के साथ मेडिकल ऑन्कोलाॅजी में इंडोर वार्ड शुरू करना जरूरी है, जिससे खासतौर पर दूरदराज के मरीजों को राहत मिलती है। कई मामलों में मरीज को दो से चार दिन तक कीमोथैरेपी या अन्य उपचार के लिए रुकना पड़ता है, लेकिन इंडोर वार्ड न होने से उनको होटलों या अन्य संस्थानों में जाना पड़ रहा है। हालांकि अस्पताल के पास रेडक्राॅस अटेंडेंट सराय उपलब्ध है, लेकिन जहां जाने से मरीजों के साथ तीमारदारों की परेशानी बरकरार रहती है। अस्पताल के डे केयर में रोजाना 10 से 15 कीमोथैरेपी के मामले किए जा रहे हैं। जीएमसी जम्मू के दूसरे फ्लोर पर (पुराने आईसीयू) में कैंसर मरीजों के लिए तीस बिस्तर स्थापित हैं, जिसमें जीएमसी के अलावा राज्य कैंसर संस्थान से मरीजों की भर्ती होती है। लेकिन यहां अधिकांश बिस्तरों पर मरीजों के रहने से राज्य कैंसर संस्थान से आने वाले मरीजों को कई बार बिस्तर नहीं मिल पाता है। राज्य कैंसर संस्थान में राजोरी, पुंछ, रामबन, किश्तवाड़, डोडा जैसे दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों से भी मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं। एक कीमोथैरेपी में एक सामान्य मरीज में 2 घंटे या अन्य मामलों में छह घंटे तक लग सकते हैं। इंडोर वार्ड के स्थापित होने के बाद ही अगले चरण में बोन मेरोट्रांसप्लांट पर सोचा जा सकता है। लेकिन अभी इंडोर वार्ड के लिए ही माथापच्ची जारी है।
इसी माह इंडोर वार्ड शुरू करने का दावा
जीएमसी जम्मू के प्रिंसिपल डाॅ. आशुतोष गुप्ता का कहना है कि राज्य कैंसर संस्थान का चरणबद्ध तरीके से विस्तार किया जा रहा है। कोशिश की जा रही है कि सितंबर में ही 20 बिस्तर वाले इंडोर वार्ड को शुरू कर दिया जाएगा। अगले एक-दो माह में अस्पताल में अत्याधुनिक पैट स्कैन, लीनर एक्सीलेटर जैसी मशीनें स्थापित करने की योजना है और इसके लिए प्रक्रिया जारी है।