विश्व हृदय दिवस
सुपर स्पेशियलिटी जम्मू में हृदय रोग विभाग की ओपीडी में 250 में से 10 से 15 मरीज स्टंट डालने वाली स्थिति में पहुंच रहे
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एक बार स्टंट पड़ने के बाद धूम्रपान नहीं छोड़ने और स्वस्थ जीवनशैली को अनदेखा करने वालों को सात से आठ महीने के बाद ही दोबारा स्टंट डालने की नौबत आ रही है। सुपर स्पेशियलिटी जम्मू में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा मरीज ऐसे हैं जिन्होंने धूम्रपान नहीं छोड़ा।
सुपर स्पेशियलिटी में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशील शर्मा ने बताया कि सप्ताह में दो दिन हृदय रोग विभाग की ओपीडी रहती है। इसमें 200 से 250 मरीज हर दिन आते हैं। इनमें 10 से 15 मरीज स्टंट डालने वाली स्थिति में डॉक्टर के पास पहुंच रहे हैं। बाईपास सर्जरी और स्टंट डालना पैलिएटिव प्रोसीजर में आता है। इसमें मरीज की बीमारी को पूरी तरह ठीक नहीं कर सकते लेकिन अगर सावधानियां बरती जाए तो जीवन चल सकता है। पैलिएटिव प्रोसीजर अपनाने के बाद मरीज को अपने हृदय का पहले ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत होती है। बीपी, शुगर का ध्यान रखने के साथ-साथ धूम्रपान नहीं करना होता है। तली हुई चीजों का सेवन नहीं करना होता है। सुपर स्पेशियलिटी में इस तरह के मामले आते हैं जिनमें मरीज की गलती सबसे ज्यादा होती है। डॉ. सुशील शर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर हर क्षेत्र में हृदय रोग के अलग-अलग कारण हैं। कश्मीर समुदाय में शुगर हृदय रोग का सबसे बड़ा कारण बन रहा है। कुछ क्षेत्रों में बीपी और धूम्रपान कारण है। जम्मू में लोग दूध और उससे जुड़े उत्पादों का ज्यादा सेवन करते हैं। ऐसे में यहां मोटापा हृदय रोग का बड़ा कारण बन रहा है। तनाव और अवसाद भी हृदय रोग का कारण बन रहा है। अलग-अलग कारण हृदय रोग की समस्या बढ़ा रहे हैं।
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ज्यादा वर्कआउट दिल के लिए खतरा
डॉ. सुशील ने कहा कि युवाओं में बढ़ता हृदय रोग चिंतित करने वाला है। इसका कारण ज्यादा वर्कआउट है। युवा जिम में जरूरत से ज्यादा वर्कआउट करते हैं जो हृदय के लिए अच्छा नहीं होता है। वेटलिफ्टिंग भी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में करनी चाहिए। हृदय के लिए सबसे अच्छी एक्सरसाइज दौड़, जाॅगिंग और साइकिलिंग है। शुद्ध खाना, नियमित एक्सरसाइज करनी चाहिए। तनाव से दूर रहना यह सबसे जरूरी है।
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संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान और शराब से बचाव, नियमित स्वास्थ्य जांच, मौसमी दिनचर्या स्वस्थ हृदय के लिए निवारक हैं। हृदय के लिए अनुकूल आहार और जीवनशैली अपनाएं। अर्जुन, आंवला, अश्वगंधा, हरीतकी जैसी आयुर्वेदिक औषधियां जरूरी हैं। योग ध्यान और प्राणायाम को दैनिक जीवन हिस्सा बनाना होगा।
डॉ. हरबंस सिंह, प्रभारी, क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान