अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। पिछले करीब डेढ़ माह से स्वास्थ्य निदेशक का पद भरने के लिए असमंजस बरकरार है। स्वास्थ्य विभाग के इतिहास में पहली बार हुआ है कि पद को इतने लंबे समय तक खाली रखा गया। निदेशक पद की दौड़ में कई वरिष्ठ डॉक्टरों के रहने से उपराज्यपाल प्रशासन भी फैसला नहीं ले पाया। नतीजतन, निदेशक के टेबल पर फाइलों का ढेर बढ़ रहा है। इसके कारण सैकड़ों पैरामेडिकल कर्मचारियों के तबादले नहीं हो पाए। गंभीर रूप से बीमार कर्मियों के मामले भी लटक गए।
सूत्रों के अनुसार मौजूदा एड्स कंट्रोल सोसायटी के प्रोजेक्ट निदेशक डॉ. समीर मट्टू ही उक्त पद पर कन्फर्म हैं, जबकि दौड़ में अधिकांश डॉक्टर मेडिकल अफसर हैं और वरिष्ठता सूची के आधार पर दावा कर रहे हैं। इनमें डॉ. प्रवीण योगराज, डॉ. तब्बुसम, डॉ. राजीव शर्मा, डॉ. पूनम महाजन शामिल हैं। मगर सरकार किसी पर भी फैसला नहीं ले पाई। बताया जा रहा है कि पद को भरने के लिए मुख्य सचिव और उपराज्यपाल प्रशासन तक कसरत की जा रही है, लेकिन अंतिम निर्णय नहीं हो रहा। नए नियमों के तहत अप्रैल में पैरामेडिकल कर्मियों के तबादलों के लिए ऑनलाइन विंडो खुलती है, जिसका अधिकार स्वास्थ्य निदेशक के पास होता है। इस बार पद खाली रहने से तबादले लटके हैं। अगर स्वास्थ्य निदेशक का पद भरा जाता है तो सरकार की ओर से पैरामेडिकल कर्मियों के तबादलों पर विंडो को दोबारा खोलने का विशेष प्रावधान किया जा सकता है। लंबे समय तक पद खाली रहने से जम्मू कश्मीर मेडिकल इंप्लाइज फेडरेशन भी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा चुकी है। प्रधान सुशील सूदन का कहना है - ऐसा पहली बार हुआ है कि स्वास्थ्य निदेशक चुने नहीं जा सके। इससे पहले निदेशक की सेवानिवृत्ति से पंद्रह दिन पहले ही नए आलाधिकारी पर स्थिति स्पष्ट हो जाती थी। फाइलों का ढेर बढ़ने के साथ पैरा मेडिकल कर्मियों को काम करने में परेशानी हो रही है।
अगर मट्टू योग्य तो नियुक्ति पर विचार करें
जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने कहा है कि अगर एड्स कंट्रोल सोसायटी के प्रोजेक्ट निदेशक डॉ. समीर मट्टू नियमानुसार योग्य हैं तो स्वास्थ्य निदेशक के पद पर उनकी नियुक्ति पर विचार किया जा सकता है। न्यायिक सदस्य सुरेश कुमार मोंगा ने सरकार के प्रधान सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग को इस बारे में आदेश दिया है। कहा कि यदि नियमों के अनुसार योग्य हैं तो उन्हें पद पर तैनात करने के लिए विचार करें। फिलहाल इस समय मट्टू इंचार्ज निदेशक हैं। लंबे समय से उनका मामला विचाराधीन था। जेएनएफ