नशे के कारोबारियों ने मंदिरों के शहर को उड़ता जम्मू बना दिया है। पंजाब में नशे की हालत को लेकर बनाई गई फिल्म उड़ता पंजाब जैसे हालात जम्मू में बनते जा रहे हैं।
पुलिस के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो साफ हो जाता है कि नशा तस्कर किस कदर युवाओं पर हावी हो रहे हैं। नशे की लत लग चुके युवाओं से लेकर स्कूल, कालेज और बड़े घरों के बच्चों को मुख्य रूप से टारगेट किया जा रहा है। इसके लिए सरकारी इमारतों और कारपोरेट कार्यालयों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 2016 में पहले छह महीने में 93 केस एनडीपीएस के दर्ज हुए हैं। इसमें 57 का चालान पेश हो चुका है और 36 अभी जांच के दायरे में हैं। 136 आरोपी इन मामलों में गिरफ्तार किए गए हैं। 20 किलो चरस, 10 किलो हेरोइन, 11 किलो ब्राउन शुगर, पौने दो क्विंटल भुक्की, 27729 कैप्सूल, 1997 कोरेक्स और 57 किलो गांजा बरामद किया गया।
जुलाई का महीना भी शामिल कर लिया जाए तो ब्राउन शुगर तीन किलो और पकड़ी गई। यह आंकड़े दिखाते हैं कि हर दूसरे दिन एनडीपीएस का एक केस दर्ज हो रहा है।
इन जगहों पर बिक रहा ड्रग्स
नशे की लत
- फोटो : डेमो फोटो
इसी तरह कठुआ जिले में पिछले छह महीनों में 28 मामले दर्ज किए गए हैं, इनमें 38 लोग गिरफ्तार हुए। इसमें पौने दो किलो हेरोइन, साढ़े चार किलो ब्राउन शुगर, भुक्की 4 किलो, चरस 23 ग्राम, कैप्सूल 10 हजार, सांबा जिले में हालांकि आठ ही मामले दर्ज हुए हैं। इनमें हेरोइन और ब्राउन शुगर का मामला कोई नहीं। इससे साफ हो जाता है कि पंजाब बार्डर से हो रही नशा तस्करी को जम्मू लाया जा रहा है।
शहर के मनोचिकित्सक अस्पताल और बाहु प्लाजा मुख्य रूप से तस्कर इस्तेमाल कर रहे हैं। अस्पताल में जहां नशे की लत छुड़ाने आने वाले युवाओं को टारगेट किया जा रहा है, वहीं बाहु प्लाजा जैसे इलाकों में आने वाले बड़े घरानों के लड़के-लड़कियों को टारगेट किया जा रहा है। सबसे ज्यादा इस्तेमाल हेरोइन और ब्राउन शुगर का हो रहा है।
इनको बनाया जा रहा शिकार
स्कूलों में पढ़ने वाले आठवीं कक्षा के ऊपर वाले बच्चों, कालेज स्टूडेंट्स और यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स को तस्कर अपना शिकार बना रहे हैं। यहां से आसानी से इन्हें पैसे मिल जाते हैं।
तस्करी के नए तरीके
ड्रग्स
- फोटो : Demo Pic.
युवतियों को तस्करी में लगाया गया है। वाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं। बाइक सवार युवा इसकी सप्लाई नशा खरीदने वालों को उनके घर तक पहुंचा देते हैं। एक-एक डोज बनाकर बेची जाती है, ताकि किसी को शक न हो।
400 से ज्यादा ड्रग एडिक्ट पंजीकृत
नशे की लत में लग चुके 400 से अधिक युवा पंजीकृत हैं, जिनका ड्रग एडिक्शन सेंटर में इलाज चल रहा है। पिछले दो महीनों के भीतर दो युवाओं की इससे मौत हो चुकी है। नशा करने वालों में अब युवतियां भी तेजी से शामिल हो रही हैं। वहीं नशा करने वाले खुद नशा तस्कर भी बन रहे हैं।