बॉर्डर के सामने जो गांव नजर आ रहा है, वह पाकिस्तान का सहनके गांव है। ऊंची-ऊंची हरी घास दिखाई दे रही है...वही उनकी फसल है। हम सुरक्षा के नजरिए से दो से ढाई फीट की फसल उगाते हैं। पाकिस्तान को आतंकवाद फैलाना है, इसलिए वह सीमा पर छह फीट से भी ऊंची उगने वाली फसलें लगाते हैं।
इन फसलों में छिपकर पाकिस्तान की ओर से बॉर्डर पर नशे से लेकर हथियार और आतंकवाद फैलाने की साजिश रचते हैं। भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे नौशेरा गांव के सरदार स्वर्ण सिंह सीमा पार पर लगी फेंसिंग की ओर देखते हुए कहते हैं कि पाकिस्तान तो सीमा पर फसल नहीं, आतंकवाद बोता है।
पहलगाम में हमारे अपनों की हत्या कर उसने अच्छा नहीं किया। अब वक्त आ गया है कि पाकिस्तान को सबक सिखाया जाए। बुधवार को दिन के 12 बज चुके थे। धूप चटक थी। तापमान 44 डिग्री के आसपास था। भारत-पाकिस्तान की फेंसिंग के सहारे हम आगे बढ़ रहे थे। तभी एक गुरुद्वारे के पास पानी पिलाने की सेवा हो रही थी। हमारी गाड़ी देखकर कुछ सिख सेवादारों ने रुक कर पानी पीने का इशारा किया।
गुरुद्वारे के बिल्कुल पास बगल में पेड़ों के नीचे कई लोगों का जमघट लगा था। यह सब भारत-पाकिस्तान के बॉर्डर पर स्थित जीरो लाइन के पास था। यहां रुकते ही किसानों ने सीमा पर वर्तमान माहौल को लेकर खुलकर बात की। स्वर्ण सिंह कहते हैं कि पाकिस्तान न कभी सुधरा था, न सुधरेगा। वह इशारा करते हुए बताते हैं कि फेंसिंग के अंदर हमारी फसलों के आगे यह जो ऊंची-ऊंची फसल दिख रही है, यह मक्की है। पाकिस्तान के हिस्से में आती है। स्वर्ण सिंह सवाल उठाते हैं कि जब सीमा पर हम ढाई फीट की फसल उगाते हैं, तो पाकिस्तान क्यों नहीं ऐसा करता है?
गौर से सुनते हैं अजान...कहीं देश के खिलाफ मुनादी हो तो सेना को बताएं
80 साल के सरदार जोरावर सिंह कहते हैं कि पाकिस्तान की तो नीयत में ही खोट है। वह तो फसलों के सहारे भी आतंकवाद फैलाता है। वह इन्हीं ऊंची फसलों के सहारे भारत को अस्थिर करने की कोशिश करता है। आतंकियों और आईएसआई के एजेंट इन्हीं फसलों में छिपकर भारत में नशे की सामग्री और हथियार भेजता है।
जोरावर सिंह बताते हैं, आजादी से पहले यह सब हमारा ही हिस्सा था। बचपन से लेकर जवानी और बुढ़ापा इसी मिट्टी में गुजरा है। जहां हम बैठे हैं, यह जमीन तो हमारी है ही, पाकिस्तान के सहनके गांव की भी जमीन हमारी ही है। उन इलाकों में जो कभी गुरुद्वारा हुआ करते थे, पाकिस्तान में उनको मस्जिदों में बदल दिया गया है। उन मस्जिदों से आने वाली अजान हमारे गांव में सुनाई पड़ती है। अजान पंजाबी में होती है, इसलिए इन अजानों से होने वाली मुनादी भी साफ सुनाई पड़ती है। इस वक्त तो हम उनकी अजान गौर से सुनते हैं कि कहीं देश के खिलाफ कोई मुनादी तो नहीं हो रही। अगर ऐसा हो तो वह अपनी सेना को बता सकें।
माहौल खराब करना है इसलिए फसल भी नहीं काटी
स्वर्ण सिंह का समर्थन करते हुए किसान भरपूर सिंह कहते हैं कि हम लोगों ने अपनी फसले तो काट ली, लेकिन पाकिस्तान ने तो फसल भी नहीं काटी। उनका कहना है कि पाकिस्तान फसल काटेगा भी नहीं, क्योंकि उसको तो इतनी फसलों के बीच से भारत में आतंकवाद को बढ़ाना है और माहौल खराब करना है। वह बताते हैं कि कई बार तो जब अपने खेतों में पानी की बोरिंग करते हैं, तो पाकिस्तान के किसान कहते हैं कि इससे उनकी जमीन का पानी कम हो रहा है। भरपूर कहते हैं कि अब जब सिंधु नदी से पानी पाकिस्तान में रुकेगा, तो उनको इसकी असलियत पता चलेगी। उनका मानना है कि भारत को अब पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा हमला करना चाहिए।
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आतंक को पनाह देती हैं फसलें
इसी गांव के किसान हाकम सिंह बताते हैं कि जब हम अपने खेतों में फसल काटते हैं, तो सहनके गांव के लोग भी हमारे बिल्कुल पास वाली जमीन में आकर अपनी फसलों को काटते हैं। हाकम सिंह का दावा है कि बॉर्डर पर बसे पाकिस्तानी किसानों को उनकी सेना की ओर से स्पष्ट दिशा निर्देश मिले हैं कि इस इलाके में ज्यादा से ज्यादा ऊंचाई वाली फसलों को ही बोया जाए। ये फसलें आतंकवाद को पनाह देती है।