सरकार के पॉलीथिन लिफाफे प्रयोग न करने के आदेश को दुकानदार ठेंगा दिखा रहे हैं।
शहर की सफाई व्यवस्था के चरमराने के पीछे सबसे बड़ा कारण पॉलीथिन है। गलियों, नालियों यहां तक कि सूर्य पुत्री तवी में भी पॉलीथिन सबसे ज्यादा समस्या पैदा कर रहे हैं। बाजारों में पॉलीथिन धड़ल्ले से बिकता है। कारण है कि लोगों द्वारा इसका धड़ल्ले से प्रयोग होता है।
पर्यावरण विशेषज्ञ कहते हैं कि पॉलीथिन और प्लास्टिक से बने लिफाफे नान-बायोडिग्रेडेबल होते हैं, जो कि लंबे समय के बाद भी नष्ट नहीं होते हैं। सिर्फ इतना ही नही, इसमें मौजूद विषैले रसायन मिट्टी को भी दूषित करते हैं।
पशुओं की सुरक्षा और देखभाल पर आधारित एक राष्ट्रीय सेमीनार में भी यह बात कही गई थी कि 60 प्रतिशत खुले में घूमते दुधारू पशु पॉलीथिन खाने से मरते हैं।
जम्मू कश्मीर में जेएंडके नान बायोडिग्रेडेबल मैटीरियल मैनेजमेंट एंड डिसपोजल एक्ट वर्ष 2007 में लागू हुआ था लेकिन उसके बाद भी राज्य में पॉलीथिन का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। इस एक्ट में लिखा गया है कि 20 माइक्रॉन से कम का पॉलीथिन प्रयोग करने लायक नहीं होता है लेकिन सूत्रों के अनुसार शहर में 5 से 15 माइक्रोन से बने पॉलीथिन लिफाफों का प्रयोग धड़ल्ले से जारी है।
जम्मू नगर निगम के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी शहर में पॉलीथिन के खिलाफ अभियान चलाता है लेकिन ठोस परिणाम सामने नहीं आ पा रहे हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पिछले कुछ दिनों तक 1000 क्विंटल पॉलीथिन जब्त किया। जम्मू नगर निगम भी अपनी ड्राइव के बाद जब्त पॉलीथिन को बोर्ड को सौंप देता है लेकिन इसको नष्ट करने की नीति फिलहाल कोई नहीं है।