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उठाया सीमांत क्षेत्रों के विकास का मुद्दा

Thu, 12 Feb 2015 11:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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राज्यपाल एनएन वोहरा ने तीनों खित्तों के सीमांत क्षेत्रों के तेजी से विकास के लिए विशेष महत्व देने पर बल दिया है। नई दिल्ली में आयोजित राज्यपालों के दो दिवसीय सम्मेलन में वोहरा ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में प्रभावशाली संपर्क मार्ग के बिना विकास संभव नहीं है।
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उन्होंने कहा कि ‘सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम’ के तहत सीमांत ब्लाकों को जो वार्षिक धनराशि उपलब्ध करवाई जाती है, उसमें भारी वृद्धि की जरूरत है। जम्मू संभाग में पड़ने वाली अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान की ओर से लगातार सीजफायर का उल्लंघन किया जाता है। इसलिए सीमा के आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को पर्याप्त बेहतर सुविधाएं मुहैया करवाने की जरूरत है।

राज्यपाल ने कहा कि बार्डर रोड आर्गनाइजेशन (बीआरओ) के वर्तमान आकार में चौगुना वृद्धि की आवश्यकता है, क्योंकि कार्य का भार ज्यादा होने के कारण वर्तमान आकार में वह उसे पूरा करने में सक्षम नहीं है। मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वोहरा ने सड़कों एवं राष्ट्रीय राजमार्ग के रख-रखाव पर विशेष ध्यान देने पर बल दिया। उनका मानना है कि रियासत के तमाम संपर्क लिंक को बरकरार रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा सुरंगें बनाने की आवश्यकता है।
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उन्होंने जोजिला सुरंग के निर्माण में देरी की शिकायत करते हुए कहा कि खराब मौसम में वैकल्पिक मार्ग के लिए इस सुरंग के जल्द निर्माण की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सड़क नेटवर्क काफी कमजोर है, जिसके कारण परिवहन व्यवस्था कीमती होने के साथ संतोषजनक नहीं है। यही कारण है कि मैदानी इलाकों से पहाड़ी इलाकों में आवश्यक वस्तुओं के अलावा उपभोक्ता वस्तुओं को ले जाना काफी महंगा पड़ता है।

राज्यपाल ने रियासत के तीन खित्तों में सड़कों एवं सुधार पर बल देते हुए कहा कि धार-उधमपुर सड़क के विस्तार के अलावा लद्दाख खित्ते को जोड़ने वाली विलासपुर-रोहतांग पास सड़क निर्माण की जरूरत है। खराब मौसम में भी घाटी से लद्दाख जाने के लिए कोरजोक-तकलिंगा मार्ग की भी आवश्यकता है। सम्मलेन की अध्यक्षता राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने की।
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