फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राज्यपाल बोले- आतंकी हथियार छोड़ वार्ता के लिए आगे आएं, संविधान के दायरे में जो चाहते हैं वह मिलेगा

Wed, 12 Jun 2019 09:40 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
विज्ञापन
जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक - फोटो : फाइल, अमर उजाला
विज्ञापन

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने आतंकियों से हथियार छोड़ने की अपील करते हुए उन्हें बातचीत के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि बातचीत ही रास्ता है जिसके जरिये संविधान के दायरे में वह जो चाहते हैं वह उन्हें मिल सकता है। भारत को हिंसा के जरिये नहीं झुकाया जा सकता। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि आतंक के रास्ते पर गए बच्चों को वापस लाएं। इनकी वापसी के लिए सरकार हरसंभव मदद करेगी। केंद्र सरकार द्वारा उनकी वापसी को लेकर उठाए जाने वाले कदमों पर गंभीरता से विचार कर रही है। 

विज्ञापन


पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हमसे हर चीज ले लीजिए, हम अपनी जान दे देंगे, लेकिन प्यार और वार्ता के जरिये। उसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तैयार हैं, हम तैयार हैं। वार्ता की मेज पर आएं और इसे आगे ले जाएं। जो भी आप चाहते हैं उसे वार्ता के जरिये हासिल किया जा सकता है। आपका अपना संविधान है, आपका अलग झंडा है और भी जो चाहिए वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिये और संविधान के दायरे में रहकर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि आतंकियों को अभी भले इसका अहसास न हो, लेकिन 10 वर्ष में पछतावा होगा कि उन्होंने गलत रास्ता अख्तियार किया। कश्मीर में आतंकवाद की समस्या युवाओं में बेरोजगारी के कारण ही मौजूद नहीं है बल्कि लंबे समय से नेता भी लोगों को गुमराह कर रहे हैं। लोगों को आजादी और कभी-कभी स्वायत्तता के सपने दिखाए गए। उन्होंने कहा कि जब ये चीजें काम नहीं करती है तो कट्टरपंथ के जरिये जन्नत का सपना दिखाते हैं। वह युवाओं से कहना चाहते हैं कि दो स्वर्ग है- एक कश्मीर है और अगर वे अच्छे मुस्लिम बने तो दूसरा भी उन्हें नसीब होगा।
विज्ञापन


कश्मीर में इस्लामिक स्टेट (आईएस) की मौजूदगी के बारे में कहा कि यह कश्मीर की बर्बादी के रास्ते हैं। कश्मीर के युवाओं को बताना चाहते हैं कि हथियार छोड़ दो और मेरे साथ भोजन करने राजभवन आओ। फिर मुझे बताओ कि जिस रास्ते को तुमने चुना है उससे कश्मीर को क्या मिलेगा। राज्य में विधानसभा चुनाव के सवाल पर कहा कि चुनाव करवाने के समय पर गृह मंत्रालय और चुनाव आयोग फैसला लेगा। वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। चुनाव के लिए जरूरी सुरक्षा मुहैया कराए जाने पर हम चुनाव कराने को तैयार हैं। 

विज्ञापन

आतंकी संगठनों में भर्ती में आई कमी
घाटी में पाकिस्तान की ओर से की जाने वाली कोशिशों व लगातार आतंकियों के सफाये पर कहा कि इसके पीछे कई कारण हैं। पहली चीज तो यह कि पाकिस्तान खुद बहुत दिक्कत में है। दूसरी चीज यह कि पाकिस्तान को यह अहसास भी हो गया है कि वह ज्यादा देर तक अब कश्मीर के बच्चों को नहीं बहका सकता है कि हम हिंदुस्तान को तोड़कर तुम्हें कोई चीज दे देंगे। मुशर्रफ ने खुद कहा था कि भारत एक सुपर पावर है। इसे तोड़ने की कोशिश में मैं ही टूट जाऊंगा, जो लेना है इसी के सिस्टम के अंदर रहकर ले लो। इसके बाद भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता। उनके आतंकी कैंप सरहद पार जारी हैं लेकिन हमारे जवान एकदम अलर्ट है और जो भी कोई घुसपैठ करता है या तो उन्हें एलओसी पर ही मार गिराया जाता है या फिर नियंत्रण रेखा के 10 किलोमीटर के दायरे के बीच ही खत्म किया जाता है। कहा कि आतंकी संगठनों में नई भर्तियां कम हुई है क्योंकि हमारी ओर से बच्चों के प्रति हमदर्दी भरा रवैया है। 

नौजवानों से ही हल होगी कश्मीर समस्या
मलिक ने कहा कि वह मानते हैं कि कश्मीर की समस्या जब हल होगी तो वह नौजवानों के जरिये ही होगी। नेताओं से बात करके कुछ भी हल नहीं होगा। जब कभी मुझे कहा जाता है कि बातचीत करें तो हम किससे बात करें क्योंकि नेता पिछले 50 सालों से जनता से झूठ बोल रहे हैं। युवा पीढ़ी में असंतोष, गुस्सा और कट्टरता हैै। हम लगातार उनके संपर्क में हैं और उनसे बातचीत की कोशिश कर रहे हैं। युवाओं के स्वभाव में अब फर्क आ रहा है। यही कारण है कि नई भर्ती कम हो रही है। जो पाकिस्तानी आतंकी होता है वह काफी देर तक टक्कर देता है और जो स्थानीय होता हैं उसका एनकाउंटर दो घंटे के भीतर भी हो जाता है। हथियार से कुछ नहीं होता है। एलटीटीई का उदाहरण देते हुए कहा कि एलटीटीई जैसा संगठन जिसे 10 मुल्कों का समर्थन हासिल था वह पूरी तरह से बर्बाद हो गई। 

दो फीसदी मतदान पर जीतकर कश्मीर के नाम पर बोलते हैं
राज्यपाल ने कहा कि लोकसभा चुनाव में बिजबिहाड़ा जैसी जगह पर 2 प्रतिशत मतदान हुआ। उन नेताओं से यह कहना चाहता हूं कि आप कश्मीर के नाम पर बोलते हैं, लेकिन आपको तो केवल 2 प्रतिशत लोगों द्वारा ही चुना गया है। पहले आप कम से कम कश्मीर के लोगों में वोट डालने की आदत डालिए। आपने तो उन्हें भगाया है। सब मिलकर लोगों को समझाएं कि वोट ही हथियार न कि गन। इसलिए वोट डालने की आदत डालिए ताकि सरकारों की अदला-बदली हो सके। 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें