पुलवामा में सीआरपीएफ के बस पर हुए आत्मघाती हमले के बाद एक्शन में आई सरकार ने जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली है। सरकार से इस फैसले को सियासी गलियारों में बड़ा फैसला माना जा रहा है। यह फैसला दिल्ली में हुई हाईलेवल मीटिंग में लिया गया था।
एक अधिकारी ने बताया कि मीरवाइज के अलावा अब्दुल गनी भट, बिलाल लोन, हाशिम कुरैशी और शब्बीर शाह के सुरक्षा कवर वापस ले लिए गए हैं। हालांकि, इस आदेश में पाकिस्तान समर्थक अलगाववादी सैयद अली शाह गिलानी का कोई जिक्र नहीं है।
आदेश के अनुसार, अलगाववादियों को प्रदान की गई सभी सुरक्षा और वाहन रविवार शाम तक वापस ले लिए जाएंगे। किसी भी बहाने, उन्हें या किसी अन्य अलगाववादियों के अधीन कोई सुरक्षा बल या कवर प्रदान नहीं किया जाएगा। यदि उनके पास सरकार द्वारा प्रदान की गई कोई अन्य सुविधा है, तो उन्हें तुरंत वापस ले लिया जाएगा।
अधिकारियों ने कहा कि अगर कोई अन्य अलगाववादी हैं जिनके पास सुरक्षा या सुविधाएं हैं, तो पुलिस उसकी भी समीक्षा करेगी।
शुक्रवार को जम्मू कश्मीर के दौरे पर गए राजनाथ सिंह ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस और जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेताओं का नाम लिए बगैर कहा था कि पाकिस्तान और आईएसआई से आर्थिक मदद लेने वालों की सरकारी सुरक्षा पर भी नए सिरे से विचार किया जाएगा।
गृहमंत्री ने कहा था कि कुछ ऐसे असामाजिक तत्व हैं, जो सीमा पार से आतंकी संगठनों, आतंकी ताकतों और आईएसआई के साथ हाथ मिला रहे हैं। वे आतंकी साजिशों में शामिल भी हैं। वे जम्मू—कश्मीर के लोगों और खासकर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।