जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन को लेकर चल रहा गतिरोध जल्द खत्म हो सकता है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि रियासत में स्थाई सरकार बनाने के लिए भाजपा ने पीडीपी की कुछ शर्तें मान ली हैं।
श्रीनगर में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी ने पीडीपी की कुछ शर्तें स्वीकार कर ली हैं, इस बारे में जल्द ही औपचारिक घोषणा की जाएगी। बता दें कि पीडीपी ने भाजपा के सामने छह शर्तें रखी थीं।
ये शर्तें ऐसी थी जिन पर भाजपा का सहमत हो पाना आसान नहीं लग रहा था लेकिन रियासत की गद्दी हाथ से फिसलते देख भाजपा ने पीडीपी के सामने घुटने टेक दिए हैं।
सरकार गठन को लेकर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने जेएंडके के बड़े नेताओं को दिल्ली तलब किया है।
ये थीं पीडीपी की छह शर्तें
1) छह साल के पूरे कार्यकाल के लिए पीडीपी का मुख्यमंत्री। तीन-तीन साल का अवधि बंटवारा नहीं।
2) बाढ़ पीड़ितों के लिए 9800 करोड़ की अतिरिक्त केंद्रीय मदद
3) अनुच्छेद 370 पर यथा स्थिति
4) अफस्पा की तुरंत वापसी
5) जम्मू-कश्मीर के मंत्रियों के कामकाज में केंद्रीय दखल नहीं
6) केंद्रीय मंत्रिमंडल में पीडीपी के दो मंत्री। (संभावित नाम महबूबा मुफ्ती और मुजफ्फर हुसैन बेग)
दिल्ली में होगा बडा फैसला
जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन के फंसे पेंच के बीच अहम सियासी हलचल हुई है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रदेश भाजपा की कोर कमेटी के नेताओं को सोमवार पांच जनवरी को दिल्ली बुलाया है। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को होने वाली पार्टी की उच्च स्तरीय बैठक में जम्मू कश्मीर में सरकार गठन और गठबंधन पर अहम फैसला लिया जा सकता है।
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा की प्रदेश कोर कमेटी के सदस्य प्रदेशाध्यक्ष जुगल किशोर शर्मा, राष्ट्र्रीय कार्यकारिणी के सदस्य शमशेर सिंह, विधायक डॉ. निर्मल सिंह, विधायक बाली भगत, महासचिव संगठन अशोक कौल, वरिष्ठ नेता अशोक खजूरिया रविवार चार जनवरी को ही दिल्ली रवाना हो जाएंगे।
माना जा रहा है कि पिछले कई दिनों से पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस के साथ भाजपा के केंद्रीय नेताओं की गठबंधन पर चल रही चर्चा के बारे में प्रदेश नेताओं से चर्चा कर कोई अहम फैसला लिया जा सकता है।