कोरोना संकट के चलते जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार ने दूसरे राहत पैकेज को मंजूरी दी है। इसके तहत विभिन्न क्षेत्र के लोगों के लिए राहत का पिटारा खोला गया है। इसमें लोन पर स्टांप शुल्क माफ करने के साथ बिजली फिक्स चार्ज पर सरचार्ज माफ किया गया है।
बिजली विभाग की एमेनस्टी स्कीम और जीएसटी रिटर्न भरने की तिथि को भी बढ़ा दिया गया है। शुक्रवार को उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू की अध्यक्षता में हुई प्रशासनिक परिषद (एसी) की बैठक में इन फैसलों पर मुहर लगाई गई।
राहत पैकेज में अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया है। केंद्र सरकार ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत पहले 20 लाख करोड़ का पैकेज दिया था, जिसमें एमएसएमई और कमजोर क्षेत्रों पर बल दिया गया था।
जम्मू और कश्मीर सरकार ने केंद्र सरकार के पैकेज के तहत कवर नहीं किए गए क्षेत्रों के कल्याण के लिए उपायों पर विचार करने की आवश्यकता महसूस की। राहत पैकेज के तहत बिक्री कर, वैट की माफी योजना को 31 अक्तूबर तक बढ़ाया गया है।
जीएसटी से जुड़े दावों की प्रतिपूर्ति के लिए जनवरी से मार्च तक की अवधि को बढ़ाकर 15 अक्तूबर और अप्रैल से जून तक के लिए 15 नवंबर कर दिया गया है। राहत पैकेज के तहत 31 मार्च से 31 अक्तूबर तक की अवधि के लिए जम्मू और कश्मीर में सभी औद्योगिक/ वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के बिजली बिल के फिक्स चार्ज पर लगाए गए सरचार्ज का वहन प्रदेश सरकार करेगी।
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केंद्र और राज्य सरकार के राहत पैकेज के तहत नए लोन पर स्टांप ड्यूटी को माफ कर दिया गया है ताकि लोन का भार कम हो सके। प्रशासनिक परिषद ने वित्त विभाग को निर्देश दिया कि वह उद्योग और वाणिज्य विभाग के परामर्श से वर्तमान में संचालित प्रतिष्ठानों के लिए वित्तीय मदद का प्रस्ताव तैयार करे। उद्योग विभाग को हिदायत दी गई कि वह ऐसा तंत्र विकसित करे जिससे स्थानीय निर्माताओं को खरीद में प्राथमिकता मिल सके।
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