पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के विधायक वहीद पर्रा ने बुधवार को विचाराधीन कैदियों की दुर्दशा को उजागर करते हुए कहा कि यूएपीए के तहत मुकदमे की प्रक्रिया से गुजरना अपने आप में एक सजा है। यूएपीए के तहत मुकदमे का सामना कर रहे पर्रा की यह टिप्पणी एनआईए अधिनियम के तहत फास्ट-ट्रैक विशेष आतंकवाद अदालत में उनकी पेशी के दिन आई।
पुलवामा से विधायक पर्रा ने एक्स पर लिखा, 4 साल। 60 सुनवाई। 5 गवाह। एनआईए अधिनियम के तहत फास्ट-ट्रैक विशेष आतंकवाद अदालत में एक और दिन। यूएपीए के तहत न्याय ऐसा ही दिखता है। एक ऐसा कानून जहां केवल आरोप ही एक सजा है। देश भर में हजारों लोग बिना मुकदमे के सलाखों के पीछे हैं।
पर्रा ने कहा कि जुलाई महीने में जम्मू-कश्मीर की विभिन्न अदालतों में उनकी आठ सुनवाई हैं। उन्होंने कहा, इस तरह प्रक्रिया ही सजा बन जाती है।
पर्रा ने एक्स पर लिखा, मैं अपने एक महीने की अदालती डायरी साझा कर रहा हूं:
1 जुलाई – एनआईए कोर्ट, जम्मू
• 2 जुलाई – एनआईए कोर्ट, जम्मू
• 4 जुलाई – मुंसिफ कोर्ट, अवंतीपोरा
• 8 जुलाई – अतिरिक्त न्यायालय, पुलवामा
• 16 जुलाई – एनआईए कोर्ट, श्रीनगर
• 21 जुलाई – एनआईए कोर्ट, जम्मू
• 22 जुलाई – एनआईए कोर्ट, जम्मू
• 28 जुलाई – जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय