अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जीएमसी की चौथी मंजिल से सोमवार देर रात पीएचई कर्मचारी (मरीज) शवगृह परिसर की तरफ कूद गया। उसे इमरजेंसी में उपचार दिया गया, लेकिन घाव न सहते हुए मंगलवार तड़के दम तोड़ दिया। दूसरी मंजिल के मेडिसिन वार्ड-3 के बेड नंबर 37 पर उपचार चल रहा था। बीती रात अचानक घबराहट की शिकायत कर वह वार्ड से भाग गया और छत से कूद गया। पोस्टमार्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। जीएमसी पुलिस ने आरपीसी 174 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
मक्खन लाल (38) पुत्र ओम प्रकाश निवासी बजालता सिद्दड़ा को शनिवार को खून की कमी पर जीएमसी के मेडिसिन वार्ड में भर्ती किया था। शरीर में पांच ग्राम खून रह गया था। भाई सुदेश कुमार ने बताया कि खून का इंतजाम कर लिया था और सुबह खून चढ़ाया जाना था। सोमवार शाम चार बजे वह अस्पताल से चले गए और मक्खन लाल के साथ उसकी पत्नी आशु देवी और सास थी। अचानक उन्हें रात को खबर मिली कि भाई चौथी मंजिल से कूद गया है। वह अपने पीछे आठ साल का बेटा और 11 साल की बेटी छोड़ गया।
मक्खन लाल गांधीनगर पीएचई कार्यालय में स्थायी कर्मचारी था। शोक में डूबी आशु देवी ने बताया कि गत रात मक्खन लाल ने खाना खाया था, लेकिन घबराहट की शिकायत कर रहा था। सोचा कि अस्पताल में घूमा लाते हैं, ताकि मन बदल जाए। जैसे ही वह वार्ड के बाहर निकला तो सीढ़ियों में धक्का मारकर भाग गया। अन्य लोगों की मदद से जब ऊपर पहुंचीं तो वह पानी की टंकी की तरफ आगे चला गया और लोगों को देखकर उसने छलांग लगा दी।
मरीज बोले-लाल टेबलेट मांग रहा था मक्खन
वार्ड तीन के बेड-36 पर भर्ती शब्बीर अहमद ने बताया कि मक्खन लाल खुद को लाल टीका लगाने की बात कह रहा था। नर्सों को उसकी बात समझ नहीं आ रही थी। लग रहा था कि वह डिप्रेशन में है। इसके बाद वह वार्ड के बाहर चला गया और उसकी पत्नी व सास पीछे चली गईं। उसके बाद पता नहीं क्या हुआ। बेड नंबर 41 पर भर्ती सुरेंद्र कुमार ने बताया कि दिनभर मक्खन लाल ठीक दिख रहा था। हालांकि वह बेड को छोड़कर जमीन पर लेट रहा था। नर्सों से लाल टेबलेट मांग रहा था। वहीं, जीएमसी के अधीक्षक डॉ. नरेंद्र बुतियाल के अनुसार प्राइमरी रिपोर्ट में मक्खन लाल मानसिक रूप से परेशान था और परिवार से झगड़ा हुआ था, जिस कारण शायद उसने यह कदम उठाया।
पाइप की जगह जाली होती तो बच जाती जान
जीएमसी के विभिन्न वार्डों से मरीजों के कूदकर आत्महत्या की कई घटनाएं हो चुकी हैं, जिसे देखते हुए वार्डों के बाहर कॉरिडोर में लगभग जगहों पर जाली लगाई गई है। कॉरिडोर को पूरी तरह से जाली से बंद किया गया है, लेकिन शवगृह की तरफ पांच मंजिलों पर तीन फीट की पाइप ही लगाई गई। अगर उस तरफ जाली होती तो शायद मक्खन लाल कूद नहीं पाता।