मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) श्रीनगर के सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग नेे रविवार को अपनी स्थापना के एक दशक पूरे कर लिए।
बेहतर इलाज, ट्रेनिंग और अनुसंधान में राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त केंद्र के रूप में खुद को विकसित किया है। जीएमसी के मुताबिक पहले केवल 100 कोरोनरी एंजियोग्राफी से शुरुआत कर विभाग ने 2024 में 2008 प्रक्रियाओं तक विस्तार किया है।
इसी प्रकार कोरोनरी एंजियोप्लास्टी भी 2012 में 25 से बढ़कर 2024 में 1422 हो गई है, जो रोगियों की बढ़ती संख्या और जीएमसी की विशेषज्ञता दोनों को दर्शाता है। स्थायी पेसमेकर प्रत्यारोपण की संख्या 2012 में 10 से बढ़कर 2024 में 422 हो गई। विभाग नियमित रूप से इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफाइब्रिलेटर (आईसीडी) इंसर्शन, कार्डियक रीसिंक्रोनाइज़ेशन थेरेपी (सीआरटी) डिवाइस इम्प्लांटेशन, अस्थायी पेसमेकर (टीपीएम) प्लेसमेंट और लेफ्ट बंडल ब्रांच पेसिंग (एलबीबीपी) भी करता है। आयुष्मान भारत के तहत पूरी तरह से निश्शुल्क की जाने वाली सबसे अधिक प्रक्रियाओं के लिए राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष तीन हृदय केंद्रों में जीएमसी श्रीनगर शामिल है। संवाद