अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जीएमसी में लिफ्ट की हालत खराब है। ग्राउंड फ्लोर पर दोनों सामान्य लिफ्ट बंद रहने से मरीजों और तीमारदारों के साथ स्टाफ बेहाल है। कैंटीन के पास स्थापित लिफ्ट में मरीजों को वार्डों तक पहुंचाया जाता था। ग्राउंड से लेकर छठे माले तक सभी वार्डों के अलावा ऑपरेशन थियेटर और अन्य महत्वपूर्ण यूनिट है। इसके बावजूद दोनों लिफ्ट बंद रहने से स्ट्रेचर पर मरीजों की सांसें उखड़ रही हैं और तीमारदारों की उम्मीदें अव्यवस्था के आगे खत्म हो रही हैं।
यही नहीं, स्टाफ सदस्यों के भी सीढ़ियां चढ़ने में हाथ-पांव फूल रहे हैं। भीषण गर्मी में खासतौर पर बुजुर्गों को दिक्कत आ रही है। ग्राउंड फ्लोर पर 26 लोगों की क्षमता की लिफ्ट का उद्घाटन मार्च 2018 में हुआ था, लेकिन रखरखाव की कमी व अन्य कारण से बंद लिफ्ट सुर्खियों में रही। पहले फ्लोर पर विभिन्न यूनिटों के अलावा दूसरे फ्लोर पर आईसीयू, रेडियोथैरेपी वार्ड, वार्ड 3, ओल्ड क्रिटिकल केयर यूनिट, सर्जिकल ऑपरेशन थियेटर, सैनिटेशन सुपरवाइजर कार्यालय, तीसरे फ्लोर पर वार्ड 4, 5, 6, 7, चौथे फ्लोर पर वार्ड 8, 9, 10, 11 और बर्न वार्ड, पांचवें फ्लोर पर वार्ड 12, 14, 15 और पैथालॉजी विभाग व छठे फ्लोर पर माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री विभाग के अलावा डॉक्टरों की कैंटीन है। इन सभी स्थानों पर पहुंचने में अब मुश्किलें बढ़ गई हैं।
महिलाओं और बुजुर्गों ने झेली अधिक परेशानी
तीमारदार आसिफ निवासी राजोरी ने बताया कि मरीज दूसरे फ्लोर के वार्ड में भर्ती है। सुबह लिफ्ट चल रही थी, फिर बंद हो गई। सामान लाने व ले जाने में सीढ़ियों व रैंप का सहारा लेना पड़ा। छन्नी निवासी शिव दयाल ने बताया कि उनका मरीज तीसरे फ्लोर पर वार्ड-7 में भर्ती है। उनके साथ दो बच्चे हैं। लिफ्ट बंद होने से मजबूरन सीढ़ियों से जाना पड़ा। तीमारदार भगवती ने बताया कि महिलाओं और बुजुर्गों को अधिक परेशानी हो रही है। बावे निवासी रॉकी ने बताया कि उनका मरीज पांचवें फ्लोर के वार्ड-15 में भर्ती है। वह तो किसी तरह पहुंच जाएंगे लेकिन बुजुर्ग कैसे जाएंगे, यह जीएमसी प्रशासन को सोचना चाहिए। वार्ड-6 से जमीला निवासी पुंछ को रैंप के सहारे दो तीमारदारों ने किसी तरह नीचे पहुंचाया। उनकी सांसें फूल चुकी थीं। शाम तक दोनों लिफ्ट बंद थी।
नए इमरजेंसी ब्लॉक में भी लिफ्ट बनी शोपीस
नए इमरजेंसी ब्लॉक को जुलाई 2022 में शुरू किया था। तीन मंजिला ब्लॉक के शुरू होने से इमरजेंसी सुविधाओं का विस्तार तो हुआ लेकिन 11 माह से लिफ्ट बंद है। नतीजतन, मरीजों और तीमारदारों को ऊपर के फ्लोर तक पहुंचने के लिए रैंप का सहारा लेना पड़ रहा है। यहां 100 बिस्तर है। इमरजेंसी के लगभग मामले यही शिफ्ट किए जाते हैं। एक मरीज को रैंप के माध्यम से ऊपर के वार्ड तक ले जाने के लिए कम से कम चार लोग चाहिए।
लिफ्ट को जल्द शुरू करने पर काम किया जाएगा। मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
डॉ. शशि सूदन, प्रिंसिपल, जीएमसी जम्मू