आंसुओं और सिसकियों के बीच आतंकी हमले में मारे गए डॉ. शाहनवाज अहमद डार को बडगाम के नाईदगाम गांव में उनके पैतृक कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। दो हफ्ते पहले ही शाहनवाज ने बेटी की शादी की थी और वह उसका स्वागत करने के लिए घर लौटने वाले थे। इससे पहले ही दहशतगर्दों ने उनकी खुशियां मातम में बदल दीं। परिवारवालों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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मां विलाप करती हुई बोलीं, म्याने शाहनवाज सोबो, कोतु गोवहम (ओह मेरे प्यारे बेटे शाहनवाज तुम कहां चले गए)। डार के बेटे मोहसिन ने कहा कि उसने आईएएस बनने का सपना देखा था। पिता ने यह उपलब्धि हासिल करने में मदद का वादा किया था। उनके चले जाने से सारे सपने टूट गए।
डॉ. शाहनवाज को उनके पैतृक गांव में सुपुर्द-ए-खाक किया गया जहां बड़ी संख्या में लोग नम आंखों से उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। नाईदगाम गांव के रहने वाले डार रविवार देर शाम मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के गगनगीर इलाके में आतंकी हमले में मारे गए थे। डॉ. शाहनवाज डार के चचेरे भाई एडवोकेट तारिक ने बताया कि वह अपने पीछे एक बेटी और दो बेटे छोड़ गए हैं।