गांदरबल। रूसी सफेदे के पेड़ों के गिर रहे पोलन (परागकण) ने मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के लोगों का जीवन कठिन बना दिया है। इस जिले में ही नहीं बल्कि घाटी के अन्य ज़िलों में भी लोग इससे बेहद परेशान हैं। पोलन से एलर्जी हो रही हैं, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है। डॉक्टरों ने लोगों को मास्क पहने रखने की सलाह दी है। लोगों ने कहा, पोलन बच्चों और व्यस्कों दोनों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। प्रशासनिक अधिकारी रोकथाम के उपायों के बारे में गंभीर नहीं हैं।
गांदरबल के नुन्नार इलाके के निवासी शकील अहमद ने कहा, कुछ साल पहले गांदरबल के जिला प्रशासन ने इन पेड़ों को काटने का आदेश जारी किया था, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि पोलन बच्चों को अधिक प्रभावित करता है क्योंकि वे निवारक उपाय के रूप में फेस मास्क का उपयोग नहीं करते हैं। परिणामस्वरूप, पोलन उन्हें अधिक प्रभावित करता है। यह पर्यावरण को भी प्रदूषित करता है, जिससे लोगों का घूमना-फिरना मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय लोगों ने गवर्नमेंट बॉयज हाई स्कूल, नुन्नार का मामला भी रेखांकित किया, जहां कई रूसी सफेदे के पेड़ हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रतिदिन गिरने वाला पोलन छात्रों के साथ-साथ उनकी पढ़ाई को भी प्रभावित करता है। इससे वे बीमार पड़ जाते हैं। एक अन्य निवासी अत्ता मोहम्मद ने कहा कि जिन लोगों को एलर्जी है और जो पहले से ही छाती से संबंधित समस्याओं से पीड़ित हैं, वे पोलन से गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं, जो वसंत के मौसम के दौरान एक आम समस्या है।
उन्होंने कहा, प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा है, भले ही यह एक सार्वजनिक उपद्रव बन गया है। रूसी सफेदे के पेड़ों को काट दिया जाना चाहिए और उनके स्थान पर वैकल्पिक पेड़ लगाए जाने चाहिएं जो लोगों के लिए हानिकारक न हों, खासकर परागण के मौसम के दौरान।
इलाज से बेहतर है रोकथाम
चिकित्सक डॉ. अबरार अहमद ने कहा कि इस मामले से संबंधित कई दिशा निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं, जिसमें परागण के मौसम के दौरान लोगों को आवश्यक सावधानी बरतने की आवश्यकता पर ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा, 100 मामलों में से 50 प्रतिशत में अंतर्निहित कारण पोलन एलर्जी है, क्योंकि यह ऊपरी श्वसन पथ पर हमला करता है, जिससे स्थिति बिगड़ जाती है। उन्होंने कहा कि रोकथाम इलाज से बेहतर है। उन्होंने लोगों से पराग एलर्जी के प्रभाव को कम करने के लिए विशेष रूप से सुबह और शाम को फेस मास्क का उपयोग करने का आग्रह किया।
2015 में पेड़ों को काटने के निर्देश थे, लेकिन कुछ नहीं हुआ
वहीं वकील शेख मोहम्मद मुस्तसिम ने भी इस खतरे को रोकने में अधिकारियों की ओर से प्रयास की कमी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 2015 में उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि इन रूसी सफेदे के पेड़ों को काट दिया जाना चाहिए। प्रशासन को निर्देश दिए गए थे, लेकिन फिर दो याचिकाएं दायर होने के बाद आदेश में संशोधन कर दिया गया।