कश्मीर में अब आतंकवाद स्थानीय आतंकियों पर टिक गया है। पुलवामा, बांदीपोरा, कुपवाड़ा, शोपियां और अनंतनाग जिलों में कुछ पाकिस्तानी आतंकी भी सक्रिय हैं। सूत्रों का कहना है कि अब कश्मीर में 200 के आसपास आतंकी बचे हैं, जो स्थानीय हैं। यह भी आपस में रिश्तेदार हैं। यही सबसे बड़ा कारण है, इनको ढेर करने में सुरक्षा एजेंसियों को नए सिरे से रणनीति बनानी पड़ रही है।
कश्मीर में सक्रिय स्थानीय आतंकियों में औसत हर चार आतंकी आपस में रिश्तेदार हैं। इसलिए इनकी मूवमेंट भी आसान हो रही है। कहीं न कहीं इनको पनाह मिल जाती है। वह रिश्तेदारी का लाभ उठाकर अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। सेना इन आतंकियों को आतंकवाद का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लाने का प्रयास कर रही है।
कुछ ही दिन पहले सेना की तरफ से दावा किया गया था कि पिछले कुछ महीनों में 50 स्थानीय आतंकी आतंकवाद का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में आ गए हैं। एक सैन्य अफसर ने कहा कि स्थानीय आतंकी आपस में रिश्तेदार हैं। इस वजह से इनके मूवमेंट को ट्रैक करने में थोड़ी परेशानी आती है।