परिसीमन आयोग की ओर से जम्मू-कश्मीर के सभी जिलों के उपायुक्तों से 18 बिंदुओं पर मांगी गई रिपोर्ट के बाद राजनीतिक हलकों में सरगर्मी तेज हो गई है। प्रदेश में विधानसभा की सात सीटें बढ़नी हैं। इसमें चार सीटें जम्मू और तीन सीटें कश्मीर के खाते में आने की संभावना है।
आबादी के हिसाब से अनुसूचित जनजाति को भी पहली बार प्रतिनिधित्व का मौका मिलेगा। परिसीमन के बाद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सात विधानसभा सीटों का रोस्टर बदल जाएगा। नियमानुसार दो विधानसभा चुनाव के बाद रोस्टर बदल जाना चाहिए लेकिन यहां चार चुनाव बिना रोस्टर बदले ही हो गए हैं। आरक्षित सभी सीटें जम्मू संभाग में ही हैं।
जम्मू में रायपुर दोमाना, छंब, चिनैनी, सांबा आदि अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। इनके ओपन होने की संभावना को देखते हुए अभी से सभी राजनीतिक दलों के नेताओं की ओर से क्षेत्र में सरगर्मी बढ़ा दी गई है। कहा जा रहा है कि परिसीमन आयोग की ओर से जल्द ही दूसरी बैठक बुलाई जाएगी। इसमें सभी सांसदों से विचार विमर्श किया जाएगा।
दूसरी बैठक में नेकां के तीनों सांसदों डॉ. फारूक अब्दुल्ला, हसनैन मसूदी व मोहम्मद अकबर लोन के भाग लेने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि आयोग की ओर से सभी डीसी से जल्द ही परिसीमन को लेकर वर्चुअल संवाद किया जाएगा। इसके बाद आयोग की दूसरी बैठक बुलाई जाएगी।
दूर होंगी विसंगतियां
सूत्रों के अनुसार परिसीमन के बाद सभी विसंगतियां दूर हो सकती हैं। आयोग ने प्रशासनिक चुनौतियों के मद्देनजर जानकारी मांगी है कि यदि कोई विधानसभा क्षेत्र एक से अधिक जिले में लगता हो, तहसील का दायरा एक से अधिक विस क्षेत्र में हो, पटवारी हलका, राजस्व गांव एक से अधिक विस क्षेत्र में आता हो। आयोग ने माइग्रेशन करने वाली आबादी के बारे में भी जानकारी मांगी है ताकि उनकी भी चुनाव में हिस्सेदारी सुनिश्चित कराई जा सके।
जम्मू-कश्मीर में विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या को लेकर व्यापक पैमाने पर विसंगतियां हैं। जम्मू संभाग में कुछ सीटों पर मतदाताओं की संख्या एक लाख से अधिक भी है तो कश्मीर में कई सीटों पर मतदाताओं की संख्या 50 हजार से कम है। इसलिए आयोग ने अधिक और कम आबादी वाले इलाकों के बारे में भी जानकारी एकत्रित की है।