घाटी में अब नेकां को भी झटका लगा है। पूर्व राज्यसभा सदस्य जीएन रतनपुरी ने रविवार को पार्टी छोड़ दी। माना जा रहा है कि पुलवामा निवासी रतनपुरी ने बढ़ते मतभेद के चलते ही पार्टी छोड़ने का फैसला किया। अब समर्थकों को रतनपुरी के नए कदम का इंतजार है।
फारुक अब्दुल्ला को भेजे गए पत्र में रतनपुरी ने लिखा है कि मैं पार्टी की केंद्रीय कार्यसमिति के अलावा सभी पदों से इस्तीफा दे रहा हूं। पार्टी से मेरी विदाई भी उसी तरह होनी चाहिए जैसी शुरुआत हुई थी। उन्होंने पत्र में लिखा कि पिछले दस सालों के दौरान पार्टी के प्रदेश अध्यक्षों व विभिन्न पदाधिकारियों के साथ जिन असहमतियों पर मैं लगातार लिख रहा था उससे संबंधों में खटास आ रही थी। इसे रोकने के लिए ही मैंने त्यागपत्र देना बेहतर समझा। मुझे आशा है कि पार्टी पदाधिकारी किसी भी टिप्पणी को निजी तौर पर नहीं लेगें।
5 अप्रैल 1954 को पुलवामा जिले के रतनीपोरा में जन्मे गुलाम नबी वानी रतनपुरी का नेकां के साथ लंबे समय से जुड़ाव रहा। वह पार्टी के मुखपत्र नवा-एक-सुबह के साथ 1979 में जुड़ गए थे। 1981 में उन्होंने प्रोग्रामर के रूप में आल इंडिया रेडियो ज्वाइन कर लिया परंतु उनका साथ पार्टी के साथ बना रहा। सन 2000 में शेख अब्दुल्ला के निधन तक वह अखबार से भी जुड़े रहे। 2004 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव में सार्वजनिक रूप से उमर अब्दुल्ला के लिए काम किया। 2008 में उमर अब्दुल्ला के कहने पर विधानसभा चुनाव लड़ने को तैयार हुए। आल इंडिया रेडियो सर्विस से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर मैदान में उतरे परंतु पीडीपी के खलील बंद के खिलाफ उन्हें भारी मतों से पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बाद पार्टी ने उनके व्यक्तित्व को ध्यान में रखते हुए उन्हें राज्यसभा भेजा था।