फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पीडीपी को झटका, पूर्व मंत्री खलील बंद नेकां में शामिल, फारूक अब्दुल्ला ने किया स्वागत

Sun, 21 Jul 2019 10:28 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
विज्ञापन
पूर्व विधायक खलील बंद ने फारुक अबदुल्ला की मौजूदगी में नेकां का दामन थामा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

चार दिन पहले पीडीपी का दामन छोड़ने वाले पूर्व मंत्री और पुलवामा से तीन बार विधायक रहे मोहम्मद खलील बंद रविवार को नेशनल कांफ्रेंस में शामिल हो गए। नेकां अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला ने उनका पार्टी में स्वागत किया।

विज्ञापन


पीडीपी के संस्थापक सदस्य खलील बंद ने वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए गत बुधवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। लगातार तीन बार 2002, 2008 और 2014 में पुलवामा से विधायक बने। वे पुलवामा जिले के पीडीपी अध्यक्ष भी थे। इस्तीफा देने के बाद ही उन्होंने संकेत दिए थे कि वे नेशनल कांफ्रेंस से नई राजनीतिक पारी की शुरुआत कर सकते हैं। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को भेजे इस्तीफे में उन्होंने कहा था कि पीडीपी से किनारा करने का कारण यह है कि पार्टी द्वारा पुलवामा की जनता को नजरअंदाज किया गया। पार्टी में उन लोगों की चलती है, जो हार कर आए थे।

जो जीत कर आए थे उनकी कहीं पर सुनवाई नहीं हो रही। उनकी कहीं पर इज्जत नहीं रखी गई और सीनियर लोगों के साथ बहुत बेइज्जती हुई। इसलिए यह कदम उठाना पड़ा। हमने मुफ्ती मोहम्मद सईद के साथ 2002 से काम किया। उनके साथ काम करके बहुत कुछ सीखा और पाया भी, लेकिन अब कुछ गिने-चुने लोग महबूबा मुफ्ती के आसपास हैं, जिन्होंने सीनियर नेताओं को किनारे कर दिया है। वह जो सलाह महबूबा को देते हैं वैसा ही होता है। हम लोगों की सलाह पर कोई सुनवाई नहीं होती।
विज्ञापन


अब तक आठ पूर्व विधायक छोड़ चुके हैं पार्टी
पिछले साल जून में पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के गिरने के बाद पीडीपी से आठ पूर्व विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। इनमें अल्ताफ बुखारी, डा. हसीब द्राबू, बशारत बुखारी, इमरान रजा अंसारी, जावेद मुस्तफा मीर, आबिद अंसारी और अब्बास वानी शामिल हैं। 

विज्ञापन

अब घाटी में नेकां को लगा झटका, पूर्व सांसद रतनपुरी ने छोड़ी पार्टी

घाटी में अब नेकां को भी झटका लगा है। पूर्व राज्यसभा सदस्य जीएन रतनपुरी ने रविवार को पार्टी छोड़ दी। माना जा रहा है कि पुलवामा निवासी रतनपुरी ने बढ़ते मतभेद के चलते ही पार्टी छोड़ने का फैसला किया। अब समर्थकों को रतनपुरी के नए कदम का इंतजार है। 

फारुक अब्दुल्ला को भेजे गए पत्र में रतनपुरी ने लिखा है कि मैं पार्टी की केंद्रीय कार्यसमिति के अलावा सभी पदों से इस्तीफा दे रहा हूं। पार्टी से मेरी विदाई भी उसी तरह होनी चाहिए जैसी शुरुआत हुई थी। उन्होंने पत्र में लिखा कि पिछले दस सालों के दौरान पार्टी के प्रदेश अध्यक्षों व विभिन्न पदाधिकारियों के साथ जिन असहमतियों पर मैं लगातार लिख रहा था उससे संबंधों में खटास आ रही थी। इसे रोकने के लिए ही मैंने त्यागपत्र देना बेहतर समझा। मुझे आशा है कि पार्टी पदाधिकारी किसी भी टिप्पणी को निजी तौर पर नहीं लेगें। 

5 अप्रैल 1954 को पुलवामा जिले के रतनीपोरा में जन्मे गुलाम नबी वानी रतनपुरी का नेकां के साथ लंबे समय से जुड़ाव रहा। वह पार्टी के मुखपत्र नवा-एक-सुबह के साथ 1979 में जुड़ गए थे। 1981 में उन्होंने प्रोग्रामर के रूप में आल इंडिया रेडियो ज्वाइन कर लिया परंतु उनका साथ पार्टी के साथ बना रहा। सन 2000 में शेख अब्दुल्ला के निधन तक वह अखबार से भी जुड़े रहे। 2004 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव में सार्वजनिक रूप से उमर अब्दुल्ला के लिए काम किया। 2008 में उमर अब्दुल्ला के कहने पर विधानसभा चुनाव लड़ने को तैयार हुए। आल इंडिया रेडियो सर्विस से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर मैदान में उतरे परंतु पीडीपी के खलील बंद के खिलाफ उन्हें भारी मतों से पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बाद पार्टी ने उनके व्यक्तित्व को ध्यान में रखते हुए उन्हें राज्यसभा भेजा था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें