सरकारी दावे तो बहुत हैं लेकिन खाने पीने के फिर भी लाले हैं। कर्फ्यू की पाबंदियों के बीच अस्पतालों से लेकर टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर और गली मोहल्लों में फंसे बाहरी इलाकों के लोगाें को खाना मयस्सर नहीं हो रहा। घाटी में जरूरतमंद लोगाें, खासकर फ्लोटिंग पॉपुलेशन (प्रवासी जनसंख्या) के सामने खड़े दो जून की रोटी के इस संकट में मोहल्ला कमेटियों के वालंटियर संकट मोचक साबित हो रहे हैं।
श्रीनगर शहर सहित आसपास के इलाकों में दर्जनों की तादाद में मोहल्ला कमेटियाें के लंगर सक्रिय हो गए हैं। बाकायदा चंदा एकत्रित हो रहा है। खाने का सामान जुट रहा है। खाना लजीज बने इसका भी ख्याल रखा जा रहा है।
बनने के बाद खाने की पैकिंग और कर्फ्यू की पाबंदियों में फंसे लोगाें तक डिलीवरी पहुंचाने के लिए मोहल्ला कमेटियाें के वालंटियराें का नेटवर्क संगठित होकर काम कर रहा है। कर्फ्यू की पाबंदियाें को दो हफ्ते हो गए हैं।