जम्मू। जन्माष्टमी पर शहर में पतंगबाजी की धूम रही। बच्चों और युवाओं ने दिन भर जमकर पेंच लड़ाए। पतंग कटने पर पारंपरिक बोल...चल गईया, बो काटेया से सामने वाले को हार का अहसास कराया गया। छतों से डीजे की धुनों पर युवा थिरकते रहे। रात को आसमान में आग के गुब्बारे छोड़ने के साथ आतिशबाजी भी की गई। सोमवार तड़के ही शहर की कई छतों से म्यूजिक सिस्टम बजना शुरू हो गया था। दिन चढ़ने के साथ नीला आसमान पतंगों से भरता चला गया। कई छतों पर टेंट के साथ छतरियां भी लगी दिखीं। म्यूजिक सिस्टम के साथ छतों पर ही ब्रेकफास्ट और लंच किया गया। शहर के जुल्लाका मोहल्ला निवासी गगनदीप ने कहा कि पतंगबाजी हमारी संस्कृति और परंपरा को बयां करती है। जन्माष्टमी जैसे त्योहारों पर शहर में होने वाली पतंगबाजी से हमें एक दूसरे से मेल मिलाप करने का मौका मिलता है। बच्चे भी संस्कृति से जुड़ते हैं।
अधिकांश छतों से उड़ी प्रतिबंधित गट्टू डोर
जिला प्रशासन के प्रतिबंध और पुलिस प्रशासन की सख्ती के दावों के बावजूद जन्माष्टमी पर पतंगबाजी के दौरान शहर की अधिकांश छतों से गट्टू डोर उड़ाई गई। कई जगह ये डोर राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बनी। इससे कई लोग घायल भी हुए। बता दें, रक्षाबंधन पर गट्टू डोर से गला कटने से जम्मू निवासी छह साल के ध्रुव की जान चली गई थी, जबकि दर्जनों लोग घायल भी हुए।