करीब दो हफ्ते पहले मूसलाधार बारिश और बाढ़ के कहर से अभी राजोरी प्रशासन व राज्य सरकार पूरी तरह से निकली भी नहीं है कि प्रशासन के सामने बेघर हुए लोगों को वापस उनके घरों में भेज पाना भी संभव नहीं हो पा रहा है।
जानकारी के अनुसार, थन्नामंडी और गंभीर मुगलां क्षेत्रों में करीब 40 ऐसे परिवार हैं, जिनके मकानों में दरारें पड़ गई हैं। यह परिवार करीब 12 दिनों से अपने घर छोड़ कर आसपास के स्कूल भवनों या फिर कहीं जमीन पर टेंट लगा कर रह रहे हैं।
इन परिवार के सदस्यों ने स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों को साफ कह दिया है कि वह अपने घर में नहीं जाएंगे।
मुआजवा मिले तो भी वापस नहीं जाएंगे
इन लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन मकानों की मरम्मत के लिए उन्हें मुआवजा भी देता है, तो भी वह उन मकानों में नहीं जाएंगे। थन्नामंडी तहसील के पंगाई निवासी शरीफ आलम ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से गुहार लगाते हुए कहा कि वह उन्हें अपने दरारों वाले मकानों में जाने के लिए न कहें।
थन्नामंडी के ही पंगाई, मंगोटा, अजमताबाद आदि क्षेत्रों में कई मकान पहाड़ों पर बने हुए थे। पहाड़ों पर भूस्खलन होने से कुछ मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जबकि कुछ मकानों में दरारें पड़ी हैं। लोगों की मानें तो दरारों वाले मकान भी अब सुरक्षित नहीं हैं।
रहने के लिए सेफ नहीं रहे ये मकान
बारिश होने पर कभी भी भूस्खलन होने से मकान ढह सकते हैं। इतना ही नहीं राजोरी के एमएलए शब्बीर खान ने भी सरकार से पीडि़त लोगों के लिए नई कालोनी बनाने की मांग की है।
एमएलए ने कहा है कि राजोरी विधानसभा क्षेत्र में करीब 35 से 40 ऐसे मकान हैं जिनमें दरारें पड़ी हैं। यह मकान अब रहने के लिए सेफ नहीं हैं। मरम्मत के बाद भी इन मकानों के फिर से ढहने का खतरा बना रहेगा।