भारत-पाक नियंत्रण रेखा से सटे गांव दिगवार और दलान के सैकड़ों बच्चे हर दिन जान हथेली पर रख कर शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते-जाते हैं।
चार महीने पहले बाढ़ में बह गया बेतार नदी पर बना एक मात्र झूला पुल आज तक दोबार नहीं बन पाया है। जिसके चलते हर दिन हजारों ग्रामीण और स्कूली बच्चे नदी में गिरे पडे़ झूले पुल के लोहे के रस्सों के सहारे आवाजाही करने पर मजबूर हैं।
बच्चों का कहना है कि साफ मौसम में तो हम लोग किसी न किसी तरह स्कूल पहुंच जाते हैं लेकिन बारिश होने पर हमें स्कूल से छुट्टी करनी पड़ती है।